World Malaria Day: 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस: 2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य, जागरूकता पर रहेगा खास जोर

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“ड्रिवेन टू एंड मलेरिया: नाउ वी कैन, नाउ वी मस्ट” थीम के साथ राज्यभर में अभियान, सिवान सहित सभी जिलों में कार्यक्रम

हेल्थ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता l छपरा/सिवान।

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीवीबीडीसी) के निर्देशानुसार 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस पूरे राज्य में मनाया जाएगा। इस अवसर पर मलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। राज्य मलेरिया कार्यालय ने सभी जिलों के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित करें।

इस वर्ष विश्व मलेरिया दिवस की थीम “ड्रिवेन टू एंड मलेरिया: नाउ वी कैन, नाउ वी मस्ट” रखी गई है, जिसका उद्देश्य मलेरिया उन्मूलन के लिए तेज और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य करीब
राज्य मलेरिया कार्यालय के अनुसार भारत ने वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। बिहार इस दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है और अब स्थिति काफी नियंत्रण में है। राज्य के सभी 38 जिलों में प्रति 1000 जनसंख्या पर मलेरिया के मरीजों की संख्या एक से भी कम हो गई है, जो बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मौजूदा प्रयासों को जारी रखा गया तो राज्य निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य हासिल कर सकता है।

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2027 तक ‘कैटेगरी जीरो’ का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया संक्रमण को वर्ष 2027 तक कैटेगरी-1 से कैटेगरी-जीरो तक लाने का लक्ष्य तय किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में बिहार ने मलेरिया मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज करते हुए कैटेगरी-2 से कैटेगरी-1 में जगह बनाई थी। इस उपलब्धि के लिए राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिल चुकी है।

जागरूकता अभियान पर रहेगा जोर
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिलों में दीवार लेखन (वाल पेंटिंग), रैलियां, स्कूल कार्यक्रम और मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी, जैसे मच्छरदानी का उपयोग, साफ-सफाई और जल जमाव से बचाव।

ये जिले हैं अधिक प्रभावित
राज्य में रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और मुंगेर को मलेरिया प्रभावित जिले के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी और रोकथाम के उपाय लगातार किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जागरूकता और सतर्कता ही मलेरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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