Gopalganj: कलयुग में मोक्ष का सबसे सरल मार्ग है श्रीमद्भागवत कथा : गौरंगी गौरी जी

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कटेया के बनिया छापर गांव में श्रीराम कथा के दूसरे दिन शिव–पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन, पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता। कटेया (गोपालगंज)।
कटेया प्रखंड के बनिया छापर गांव में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अनुपम दृश्य देखने को मिला। अयोध्या से पधारी अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पंडित गौरंगी गौरी जी ने शिव–पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और रसपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और सहज साधन श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण है। भागवत कथा मनुष्य के जीवन को सदमार्ग की ओर ले जाती है और भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का संचार करती है।

कथावाचिका ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी निष्कलंक भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। शिव–पार्वती का विवाह अत्यंत दिव्य, अलौकिक और अद्भुत था, जिसमें संपूर्ण सृष्टि साक्षी बनी। जब भगवान शिव नंदी पर सवार होकर भूत–पिशाचों और गणों के साथ बारात लेकर राजा हिमाचल के यहां पहुंचे, तो उस विचित्र बारात को देखकर माता पार्वती के माता-पिता आश्चर्यचकित रह गए। हालांकि माता पार्वती ने पूर्ण आनंद और श्रद्धा के साथ भगवान शिव को अपने पति के रूप में स्वीकार किया।

गौरंगी गौरी जी ने कहा कि शिव–पार्वती विवाह में केवल देवी-देवता ही नहीं, बल्कि असुर, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े सहित समस्त जीव उपस्थित थे। यहां तक कि भूत, प्रेत और पिशाच भी बाराती बनकर विवाह में शामिल हुए। यही कारण है कि भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है, जो समस्त सृष्टि को समान दृष्टि से देखते हैं और सभी के आराध्य हैं।

कथा के मुख्य यजमान एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष बबलू पांडेय अपने परिवार के साथ नियमित रूप से कथा श्रवण कर रहे हैं। कथा सुनने के लिए कटेया सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ से पंडाल खचाखच भरा रहा। कथा के दौरान श्रोतागण भक्ति रस में सराबोर नजर आए और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने कथा का भरपूर आनंद लिया और आयोजकों की सराहना की।

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