Siwan: बसंत से प्रकृति और संत के आगमन से संस्कृति में आता है बदलाव: सिग्रीवाल

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बड़ी देवी मंदिर के वार्षिकोत्सव पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन पहुंचे भाजपा सांसद, व्यासपीठ पूजन कर कथा वाचिका को किया सम्मानित

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता। महाराजगंज (सिवान)।
अनुमंडल मुख्यालय के दुर्गा चौक नखास स्थित बड़ी देवी मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन धार्मिक और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर स्थानीय भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने महायज्ञ स्थल पर पहुंचकर व्यासपीठ का विधिवत पूजन किया तथा श्रीधाम वृंदावन से पधारी प्रसिद्ध कथा वाचिका श्यामा किशोरी जी को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

सभा को संबोधित करते हुए सांसद सिग्रीवाल ने कहा कि संत हमारे सभ्यता और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। जैसे बसंत ऋतु के आगमन से प्रकृति में हरियाली और नवजीवन का संचार होता है, ठीक उसी प्रकार संतों के आगमन से समाज और संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन आता है। संत समाज को धर्म, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि सत्संग से व्यक्ति के भीतर संस्कारों का निर्माण होता है और राष्ट्र सेवा की भावना जागृत होती है। सत्संग केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला माध्यम है, जो आपसी प्रेम, एकता और सद्भावना को मजबूत करता है। धार्मिक आयोजन समाज में समरसता और भाईचारे का संदेश देते हैं।

सांसद ने आगे कहा कि हमारे प्राचीन ग्रंथ और संतों की संगति हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। दूसरों को अपनी वाणी और व्यवहार से कष्ट न पहुंचाना ही सच्चा सत्संग है। आज के समय में जब सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने की आवश्यकता है, ऐसे आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

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उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार सनातन संस्कृति की रक्षा और राष्ट्रहित के प्रति पूर्णतः समर्पित है। सरकार का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम में डॉ. त्रिपुरारी शरण, अजय कुमार, धर्मराज कसेरा, भाजपा नेत्री सुप्रिया जयसवाल, पवन कुमार, डेनिस कुमार, नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। महायज्ञ स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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