Siwan History: 200 साल पुरानी पांडुलिपियों ने खोला सीवान के समृद्ध व्यापारिक अतीत का राज

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डीएम ने की पहल—घर-घर से 75 साल से अधिक पुरानी धरोहर खोजकर ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर साझा करने की अपील

डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सीवान, कृष्ण मुरारी पांडेय।
सीवान जिले के इतिहास को नई रोशनी देने वाली एक बड़ी खोज सामने आई है। ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में करीब 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां मिली हैं, जो 1800 से 1950 के बीच जिले की आर्थिक गतिविधियों का विस्तृत और प्रमाणिक चित्र प्रस्तुत करती हैं। यह दुर्लभ दस्तावेज बाबुनिया रोड स्थित रूह आफजा मंजिल में सामाजिक कार्यकर्ता मुहम्मद फरीद के घर से सामने आए हैं।

जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने स्वयं मौके पर पहुंचकर इन पांडुलिपियों का अवलोकन किया। उन्होंने इसे जिले के इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आम जनता से अपील की कि वे अपने घरों में संरक्षित 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को खोजकर ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर साझा करें, ताकि इस विरासत को सुरक्षित और सार्वजनिक किया जा सके।

नमक-शोरा व्यापार से जुड़ा रहा सीवान का स्वर्णिम दौर
इन पांडुलिपियों में उस दौर की आर्थिक संरचना का उल्लेख मिलता है, जब सीवान ‘साल्टपीटर’ (नमक-शोरा) के उत्पादन में अग्रणी था। यह वही पदार्थ था जिसका उपयोग गन पाउडर और कपड़े धोने के पाउडर के निर्माण में किया जाता था। दस्तावेज बताते हैं कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा तैयार किया गया साल्टपीटर रघुनाथपुर के रास्ते सरयू नदी के जरिए कोलकाता पहुंचता था, जहां से इसे इंग्लैंड तक निर्यात किया जाता था।

इस व्यापार ने उस समय सीवान के कई व्यापारियों को आर्थिक रूप से बेहद समृद्ध बना दिया था। 1880 के आसपास के दस्तावेजों में इस व्यापार की पूरी व्यवस्था—उत्पादन, परिवहन और निर्यात—का विस्तृत विवरण दर्ज है।

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इतिहास से जुड़ी खास यादें भी सामने आईं
मुहम्मद फरीद ने बताया कि उनके पुश्तैनी आवास रूह आफजा मंजिल का संबंध स्वतंत्रता आंदोलन से भी रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 1940 में यहां सुभाष चंद्र बोस का आगमन हुआ था, जो इस भवन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।

स्थानीय प्रयासों की हुई सराहना
डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने पांडुलिपियों को सार्वजनिक करने में सहयोग के लिए फरीद परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सांस्कृतिक संस्था रसमंजरी फाउंडेशन, सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक और केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक चंदन कुमार के प्रयासों की भी सराहना की।

इस अवसर पर जिला शांति समिति के सदस्य उमैर फरीद, एमन फरीद तथा स्थानीय पार्षद राज कुमार बांसफोर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

धरोहर बचाने की मुहिम को मिलेगा बल
प्रशासन की इस पहल से उम्मीद है कि जिले के अन्य परिवार भी अपनी पुरानी पांडुलिपियों को सामने लाएंगे। इससे न सिर्फ सीवान के इतिहास के अनछुए पहलू उजागर होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत भी सुरक्षित हो सकेगी।


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