डी.ए.वी. पीजी कॉलेज के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष के निधन को साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया
विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों ने दी श्रद्धांजलि
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सीवान। डी.ए.वी. पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. त्रिपाठी सियारमण के निधन से जिले के साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। उनके निधन की खबर मिलते ही साहित्यकारों, शिक्षकों, कवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। सभी ने उन्हें सीवान की साहित्यिक परंपरा का मजबूत स्तंभ बताते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया।

प्रो. त्रिपाठी सियारमण लंबे समय तक डी.ए.वी. पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग का नेतृत्व करते रहे। उन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि साहित्य सृजन और सामाजिक चेतना के प्रसार में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वे जिले के विभिन्न साहित्यिक संगठनों से जुड़े रहे तथा अध्यक्ष, संरक्षक, लेखक और कवि के रूप में साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने का कार्य किया।
उनके निधन पर जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष उस्ताद कमर सीवानी, भोजपुरी विकास मंडल के अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता युगल किशोर दुबे, जनवादी लेखक संघ के सचिव मार्कण्डेय दीक्षित, प्रो. उपेन्द्र नाथ यादव, डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, अरुण कुमार सिंह, शिक्षक राम नरेश सिंह, शशि कुमार गुप्ता, परमानंद चौधरी, कन्हैयालाल प्रसाद, डॉ. के. एहतेशाम, शिक्षक उपेन्द्र यादव, फूल मोहम्मद अंसारी, अर्जुन चौधरी तथा हिमांशु शेखर एवं भोगेन्द्र नाथ झा सहित अनेक साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने संयुक्त रूप से गहरी संवेदना व्यक्त की।

शोक संदेश में कहा गया कि प्रो. सियारमण सीवान के साहित्यिक क्षितिज के सबसे उज्ज्वल सितारों में से एक थे। उनका व्यक्तित्व, साहित्य के प्रति समर्पण और नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देने की भावना सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनके निधन से उत्पन्न रिक्तता को भर पाना आसान नहीं होगा। साहित्यिक एवं शैक्षणिक जगत ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की





