Gopalganj: कटेया में कथा प्रवाचिका पं. गौरंगी गौरी – शिव शक्ति महायज्ञ के पांचवें दिन श्रीराम की बाल लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु

Share

कथा प्रवाचिका पं. गौरंगी गौरी ने श्रीराम के बाल चरित्र के माध्यम से दिया समता, करुणा और आत्मबोध का संदेश

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता । कटेया (गोपालगंज)।
कटेया प्रखंड के बनिया छापर गांव स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सप्तदिवसीय शिव शक्ति महायज्ञ के पांचवें दिन श्रीराम कथा का भावपूर्ण आयोजन किया गया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का ऐसा जीवंत और हृदयस्पर्शी वर्णन हुआ कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा प्रवाचिका पंडित गौरंगी गौरी ने अपने ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कथा के दौरान पं. गौरंगी गौरी ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु के अवतरण के साथ ही पूरी अयोध्या शहनाइयों की मधुर ध्वनि से गूंज उठी थी। नगरवासी आनंद और उल्लास में डूब गए थे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के गहरे संदेश समेटे हुए हैं। इन लीलाओं में समता, करुणा, प्रेम और मानवीय मूल्यों का स्पष्ट दर्शन होता है।

कथा प्रवाचिका ने बालक राम के कौतुकपूर्ण स्वभाव का वर्णन करते हुए बताया कि वे बाल सखाओं के साथ खेल में मग्न रहते थे, लेकिन माता कौशल्या के वात्सल्यपूर्ण पुकारते ही ठुमक-ठुमक कर उनके पास चले आते थे। यह दृश्य श्रोताओं के मन को भावुक कर गया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम की बाल लीलाओं के दर्शन के लिए देवता भी लालायित रहते थे। स्वयं भगवान शिव वीर हनुमान के साथ भेष बदलकर बाल राम के दर्शन के लिए अयोध्या आए थे।

उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा का श्रवण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में मर्यादा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। कथा के क्रम में उन्होंने संतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब जीवन में निराशा और अंधकार छा जाए, तब संत की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि संत समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करते हैं।

पूज्य देवी जी ने कस्तूरी मृग का उदाहरण देते हुए आत्मबोध का संदेश दिया और कहा कि भगवान मनुष्य के हृदय में ही निवास करते हैं, लेकिन लोग उन्हें बाहर तीर्थों और मंदिरों में खोजते फिरते हैं। अंत में उन्होंने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ के माध्यम से मनुष्य अपने कर्मों की पूर्णाहुति करता है और आत्मिक शुद्धि प्राप्त करता है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930