Munger: मुंगेर में 25 किलो दाल चोरी का आरोप: ग्रामीणों ने चार नाबालिग बच्चों को रस्सी से बांधकर पूरे गांव में घुमाया

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वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, दोषियों पर होगी कार्रवाई

बिहार डेस्क, केएमपी भारत, भागलपुर

मुंगेर। संतोष सहाय
जिले के बरियापुर प्रखंड अंतर्गत झोवाबहियार पंचायत में शनिवार को दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। यहां चार नाबालिग बच्चों को चोरी के आरोप में ग्रामीणों ने पकड़कर हाथों में प्लास्टिक की रस्सी से बांधा और पूरे गांव में घुमाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू कर दी गई है।

25 किलो दाल चोरी का आरोप, दुकान में बेचे जाने की मिली जानकारी
घटना झोवाबहियार पंचायत के वार्ड संख्या 6 की है। यहां के निवासी रविन्द्र मंडल के घर से दोपहर के समय 25 किलो दाल चोरी हो गई। आरोप है कि गांव के ही कुछ नाबालिग बच्चों ने इस दाल को चुरा कर स्थानीय दुकान में बेच दिया। जब यह बात घरवालों को पता चली तो उन्होंने बच्चों को पकड़ लिया।

गांव में घुमाया, वीडियो बनाकर किया वायरल
इसके बाद कुछ युवकों और ग्रामीणों ने मिलकर बच्चों के हाथ में पतली प्लास्टिक की रस्सी से बांध दिया और उन्हें पूरे गांव में घुमाया गया। इस दौरान किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में मासूम बच्चों की बेबसी और ग्रामीणों की कठोरता साफ देखी जा सकती है।

बुजुर्गों ने की पहल, बंधी रस्सी खुलवाई
गांव के कुछ बुजुर्गों ने जब बच्चों को इस हालत में देखा तो उन्होंने तत्काल हस्तक्षेप कर उनके हाथों से रस्सी खुलवा दी और मामले को शांत करने की कोशिश की।

पुलिस ने ली घटना की जानकारी, जांच शुरू
वीडियो वायरल होने के बाद हरिनमार थाना पुलिस को मामले की जानकारी मिली। थानाध्यक्ष ए. के. आजाद ने बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “वीडियो के आधार पर जांच की जा रही है। जो भी दोषी ग्रामीण होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

ग्रामीणों का तर्क – बच्चे नशे के आदी, करते हैं छोटी मोटी चोरी
वहीं दूसरी ओर कुछ ग्रामीणों का कहना है कि ये बच्चे नशे की लत में पड़ चुके हैं और इसी वजह से अक्सर गांव में छोटी-मोटी चोरी करते रहते हैं। हालांकि, इस तरह की सजा देना कानूनन गलत है।

मानवाधिकारों पर सवाल
इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बच्चों को सुधारने के लिए इस तरह का अपमानजनक और अमानवीय तरीका अपनाया जाना चाहिए? अब पुलिस की जांच पर निगाहें टिकी हैं कि बच्चों से ज्यादा दोषी कौन—दाल चुराने वाले या उन्हें गांव में घुमाने वाले?

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