बिहार संग्राम 2025: “जन सुराज में टिकट की जंग: सीवान जिले में गुटबाजी से बढ़ा तनाव, संभावित प्रत्याशियों में गर्म है माहौल”

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21 हजार जमा करने वाले टिकट के सभी संभावित दावेदारों के बीच विधानसभा क्षेत्र में ही चल रही है भयंकर खींचतान


सेंट्रल डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय l सीवान।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले ही जन सुराज पार्टी में विधानसभा टिकट को लेकर मची होड़ ने संगठन का माहौल बिगाड़ कर रख दिया है। कभी “सही सोच, सही लोग और सामूहिक प्रयास” के मूल सिद्धांत पर खड़ी पार्टी अब सिवान जिले के हर विधानसभा क्षेत्र में आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है। जिले के आठों विधानसभा क्षेत्रों — 105 सिवान सदर, 106 जीरादेई, 107 दरौली, 108 रघुनाथपुर, 109 दारौंदा, 110 बड़हरिया, 111 गोरेयाकोठी और 112 महाराजगंज — में टिकट पाने के लिए दावेदारों की लंबी कतार लग चुकी है और सभी अपनी ही पार्टी के संभावित उम्मीदवारों पर आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए हैं।


21 हजार के आवेदन शुल्क ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा

मालूम हो कि सिवान जिले के हर सीट से 10 से 15 संभावित प्रत्याशियों ने पार्टी को ₹21,000 आवेदन शुल्क के रूप में जमा किए हैं। यह शुल्क, जो पहले एक औपचारिक प्रक्रिया थी, अब गुटबाजी की वजह बन गया है। उम्मीदवार न सिर्फ अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, बल्कि एक-दूसरे पर बयानबाजी भी कर रहे हैं।


टिकट की दौड़ में ये हैं सीवान जन सुराज के प्रमुख चेहरे

चर्चाओं के मुताबिक, टिकट की होड़ में सीवान से कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें कुछ इस प्रकार हैं।

  • 105 सिवान सदर से अभिनव कुमार रानू और सीवान के व्यवसाई राजन गुप्ता
  • 106 जीरादेई से मैरवा के कृषि यंत्र के संभ्रांत व्यवसाई मुन्ना पांडेय, सीवान के वरिष्ठ अधिवक्ता इष्टदेव तिवारी और कृष्ण कुमार सिंह
  • 107 दरौली से चंद्रमा प्रसाद, अधिवक्ता गणेश राम और नंद जी राम
  • 108 रघुनाथपुर से अजीत कुमार सिंह और ओसिहर यादव
  • 109 दारौंदा से जन सुराज के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेंद्र सिंह और सत्येंद्र यादव
  • 110 बड़हरिया से डॉ. सबीना जावेद, गोविंदा कुमार सोनी और पूर्व जिला पार्षद मिट्ठू बाबू
  • 111 गोरेयाकोठी से जिला पार्षद रामदुलार वर्मा और मौलाना नूरुद्दीन अंसारी
  • 112 महाराजगंज से अभिषेक कुमार सिंह और राजकुमार भारती

“त्याग” की जगह “वर्चस्व” की होड़

उधर टिकट की होड़ में पार्टी की एकता और मूल उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं। संभावित उम्मीदवारों में त्याग और सामूहिकता का भाव कमजोर पड़ने लगा है। हर कोई टिकट पाने के लिए खुद को सबसे योग्य साबित करने की कोशिश में लगा है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के फैसले का सम्मान संभावित प्रत्याशी करेंगे भी या नहीं, इसे लेकर क्षेत्र के लोगों में शंका गहराने लगी है।


जातीय समीकरण पर भी है पार्टी की नजर

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा और राजद के टिकट बंटवारे के हिसाब से जातीय समीकरण देखते हुए जन सुराज नेतृत्व टिकट के दावेदार कहे जाने वाले कई नामों में बदलाव कर सकता है, ऐसी संभावना जताई जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतिम सूची में कई चेहरों को जगह मिलना तय नहीं है।


संगठन के लिए यह चुनौतीपूर्ण दौर है। यदि समय रहते विवाद नहीं सुलझा तो आंतरिक खींचतान चुनावी तैयारी को प्रभावित कर सकती है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि पार्टी अपने मूल विजन को बचाते हुए सही उम्मीदवारों का चयन कैसे करती है l

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