Big Political Twist: सिवान में जदयू-राजद का एक ही घर बना सियासत का नया केंद्र; पत्नी जदयू की प्रदेश सचिव तो पति सारण शिक्षक क्षेत्र से राजद के एमएलसी प्रत्याशी

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एक ही परिवार की अलग-अलग राजनीतिक राह ने बढ़ाई चर्चा

‘मैं कभी जदयू में नहीं रहा, हमेशा अपनी मैडम का सपोर्ट किया’। उनका राजनीतिक सफर अपनी जगह है और मेरी राजनीतिक भूमिका अपनी जगह।” प्रो. जयराम यादव

पॉलिटिकल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सिवान।

सियासत में विचारधारा, संगठन और रिश्तों के समीकरण अक्सर अलग-अलग रास्तों पर चलते दिखाई देते हैं। सिवान में इन दिनों ऐसा ही एक राजनीतिक समीकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला परिषद अध्यक्ष एवं जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश सचिव श्रीमती संगीता देवी का आवास अब राजनीतिक चर्चाओं के लिहाज से खास नजर आ रहा है। वजह है इसी परिवार के प्रो. जयराम यादव का सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल का एमएलसी प्रत्याशी बनाया जाना। राजद की ओर से प्रो. जयराम यादव के नाम की घोषणा हो चुकी है और उनके स्वागत को लेकर सिवान तथा सारण क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी देखने को मिली हैं।

एक ही परिवार में पति-पत्नी का अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा होना सिवान की स्थानीय राजनीति में स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ संगीता देवी जदयू की संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल रही हैं, तो दूसरी ओर उनके पति प्रो. जयराम यादव राजद के टिकट पर शिक्षक राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं।

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घर एक, राजनीतिक मंच अलग

राजनीति में पति-पत्नी का अलग-अलग दलों में होना कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन यहां मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि दोनों अपने-अपने राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।

संगीता देवी जिला परिषद की अध्यक्ष होने के साथ जदयू की प्रदेश सचिव हैं। वहीं प्रो. जयराम यादव लंबे समय से शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे हैं और अब राजद के प्रत्याशी के रूप में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा हैं। हाल में सिवान पहुंचने पर राजद कार्यकर्ताओं और शिक्षकों ने उनका स्वागत किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षक समाज के अधिकार और समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाने की बात कही।

यानी एक ही छत के नीचे संगठनात्मक रूप से दो अलग राजनीतिक धाराएं दिखाई दे रही हैं। यही वजह है कि इस परिवार को लेकर सिवान की राजनीतिक चर्चाओं में नया अध्याय जुड़ गया है।

सवाल परिवार का नहीं, राजनीतिक समीकरणों का

इस पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह है कि चर्चा केवल पति-पत्नी के अलग-अलग दलों में होने तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि दोनों की राजनीतिक सक्रियता किस तरह अपने-अपने संगठन और समर्थक वर्ग के बीच काम करती है।

संगीता देवी का क्षेत्र मुख्य रूप से पंचायत और जिला परिषद की राजनीति से जुड़ा है, जबकि प्रो. जयराम यादव का चुनावी क्षेत्र शिक्षक मतदाताओं तक फैला हुआ है। इसलिए दोनों की राजनीतिक भूमिकाएं अलग-अलग दायरे में काम करती हैं।

राजनीतिक रूप से देखें तो यह स्थिति सिवान में व्यक्तिगत संबंध और राजनीतिक पहचान के बीच अंतर को भी सामने लाती है। सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक दल अलग हो सकते हैं, लेकिन पारिवारिक संबंध अपनी जगह कायम रहते हैं।

पहले जदयू से जुड़ा रहा है जयराम यादव का राजनीतिक सफर

प्रो. जयराम यादव का राजनीतिक सफर भी इस कहानी को और दिलचस्प बनाता है। वर्ष 2023 में उन्हें जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव तथा जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। अब वही प्रो. जयराम यादव राजद के टिकट पर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं।

इस बदलाव ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनके पुराने राजनीतिक संबंधों और वर्तमान भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। हालांकि चुनावी राजनीति में किसी नेता का दल बदलना या अलग राजनीतिक मंच से चुनाव लड़ना अपने आप में असामान्य नहीं है।

सिवान से सारण तक नजर

प्रो. जयराम यादव के राजद प्रत्याशी बनने के बाद उनकी सक्रियता केवल सिवान तक सीमित नहीं है। सारण क्षेत्र में भी उनके स्वागत और जनसंपर्क का सिलसिला शुरू हो चुका है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सिवान का यह परिवार स्थानीय राजनीति के साथ-साथ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में भी चर्चा के केंद्र में रह सकता है।

एक ही घर में दो राजनीतिक दल—एक तरफ जदयू की संगठनात्मक जिम्मेदारी, दूसरी तरफ राजद का चुनावी दांव। सिवान की राजनीति में यह पारिवारिक समीकरण आने वाले दिनों में क्या नए संवाद और समीकरण सामने लाता है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी।

‘मैं कभी जदयू में नहीं रहा, हमेशा अपनी मैडम का सपोर्ट किया’

इस पूरे राजनीतिक समीकरण पर प्रो. जयराम यादव ने कहा कि वे कभी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा अपनी मैडम (संगीता देवी) का राजनीतिक रूप से समर्थन किया है। उनका राजनीतिक सफर अपनी जगह है और मेरी राजनीतिक भूमिका अपनी जगह।” प्रो. जयराम यादव ने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव शिक्षकों की सेवा और उनके हितों के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा शिक्षकों के साथ रहा हूं और उनके अधिकार एवं समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाता रहा हूं। शिक्षक समाज की सेवा ही मेरी प्राथमिकता रही है।”

‘आगे पार्टी का जो आदेश होगा, उसका पालन करूंगी’

इस संबंध में जिला परिषद अध्यक्ष एवं जदयू की प्रदेश सचिव संगीता देवी ने कहा कि “आगे पार्टी की ओर से जो भी आदेश और निर्देश मिलेगा, मैं उसका पूरी तरह पालन करूंगी।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक भूमिका और पार्टी के प्रति जिम्मेदारी संगठन के निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ेगी।

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