Siwan Municipality: फर्जी कार्यादेश मामला: नगर परिषद सिवान में हड़कंप, FIR के 6 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, 76 योजनाओं की फाइलें अब तक लापता

Share

नगर परिषद की 10–15 योजनाओं को छोड़ शेष कार्यादेश फर्जी होने का आरोप

जिला प्रशासन के निर्देश पर महादेवा ओपी में दर्ज है मामला

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सिवान।
नगर परिषद, सिवान में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। महादेवा ओपी थाना में प्राथमिकी दर्ज हुए छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

नगर परिषद के तत्कालीन नगर कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्वत (बि०न०से०) द्वारा 30 दिसंबर 2025 को दिए गए आवेदन के आधार पर महादेवा ओपी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला महादेवा थाना कांड संख्या 02/26 के तहत 5 जनवरी 2026 को दर्ज हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर परिषद, सिवान में 4 अक्टूबर 2025 की तिथि को निर्गत कई योजनाओं के कार्यादेश को फर्जी बताया गया है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि उस दिन जारी किए गए 10–15 विभागीय योजनाओं के कार्यादेश को छोड़कर शेष अधिकांश कार्यादेश वास्तविक नहीं हैं। इस गंभीर आरोप को देखते हुए जिला पदाधिकारी, सिवान ने संबंधित थाने को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

तीन अधिकारियों सहित अन्य कर्मियों पर आरोप

जिला प्रशासन के निर्देश के अनुपालन में नगर प्रबंधक बालेश्वर राय ने थानाध्यक्ष, महादेवा ओपी थाना को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। आवेदन में नगर परिषद के कनीय अभियंता ओम प्रकाश सुमन, तत्कालीन कार्यपालक सहायक रंजीत कुमार शर्मा तथा योजना प्रभारी विजय कुमार पासवान सहित योजना से जुड़े अन्य कर्मियों को आरोपित किया गया है। आरोप है कि इन्हीं लोगों की लापरवाही अथवा मिलीभगत से फर्जी कार्यादेश जारी किए गए, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीएनएस की धाराओं में दर्ज हुआ है मामला

पुलिस के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। महादेवा ओपी थानाध्यक्ष ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन को भी भेजी गई है प्रतिलिपि

पुलिस को दिए अपने आवेदन में नगर प्रबंधक बालेश्वर राय ने प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसकी एक प्रति नगर परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इस पूरे प्रकरण की प्रतिलिपि जिला पदाधिकारी, सिवान को भी सादर सूचनार्थ भेजी जा चुकी है, ताकि उच्च स्तर पर निगरानी बनी रहे।

नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि योजनाओं के कार्यादेश में ही फर्जीवाड़ा हुआ है तो इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

नामजद FIR, लेकिन गिरफ्तारी शून्य

वर्तमान ईओ डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि इस मामले में कनीय अभियंता ओम प्रकाश सुमन, तत्कालीन कार्यपालक सहायक रंजीत कुमार शर्मा और योजना प्रभारी विजय कुमार पासवान के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

निलंबित ईओ ने आरोप किए हैं खारिज

निलंबित ईओ अनुभूति श्रीवास्तव ने 76 योजनाओं को स्वीकृति देने और कार्यादेश जारी करने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने केवल 10 से 15 विभागीय योजनाओं पर ही हस्ताक्षर किए थे। शेष कार्यादेशों पर उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर होने की आशंका जताई थी।

डीएम को पत्र लिखकर पहले ही रखा था पक्ष

मालूम हो कि अनुभूति श्रीवास्तव ने 30 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सिवान विवेक रंजन मैत्रेय को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया था। पत्र में उन्होंने कहा था कि 4 अक्टूबर 2025 को नगर परिषद सिवान के तीनों कनीय अभियंताओं को केवल 10 से 15 योजनाओं का ही कार्यादेश उनके समक्ष प्रस्तुत संचिकाओं के आधार पर हस्ताक्षरित किया गया था। उन्होंने यह भी लिखा कि यदि शेष किसी कार्यादेश का उल्लेख निर्गत पंजी में दर्ज है, तो वह या तो उनके द्वारा हस्ताक्षरित नहीं है या फिर उस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।

76 योजनाओं की स्वीकृति, लेकिन संचिकाएं नदारद

नगर परिषद सिवान के वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. विपिन कुमार के अनुसार, पूर्व ईओ अनुभूति श्रीवास्तव के कार्यकाल में कुल 76 योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी। इन सभी योजनाओं का विस्तृत विवरण भी जारी किया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन 76 योजनाओं से संबंधित संचिकाएं नगर परिषद कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं हैं। योजनाओं की फाइलों का इस तरह गायब होना प्रशासनिक लापरवाही से कहीं अधिक गंभीर संकेत दे रहा है।

फाइलें गायब होने पर हुई थी छापेमारी

संचिकाओं के गायब होने को गंभीरता से लेते हुए 30 दिसंबर 2025 को नगर परिषद के कार्यालय सहायक रंजीत कुमार शर्मा और कनीय अभियंता ओम प्रकाश सुमन के आवास पर छापेमारी की गई थी। हालांकि छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

जांच पर टिकी हैं सबकी निगाहें

एफआईआर के छह दिन बाद भी कार्रवाई आगे न बढ़ने से आम लोगों में नाराजगी है। जानकारों का कहना है कि 76 योजनाओं और उनकी फाइलों का गायब होना महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी, लेकिन इस प्रकरण ने नगर परिषद सिवान में चल रही योजनाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031