सीवान में जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता, जिलाध्यक्ष सुशील कुमार बोले– मनरेगा गरीबों के काम के अधिकार की संवैधानिक गारंटी
सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सीवान।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को जिला कांग्रेस कार्यालय, पकड़ी मोड़, गौशाला रोड, सीवान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को योजनाओं से हटाने की साजिश का आरोप लगाया।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सीवान कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल गांधी जी के विचारों का अपमान है, बल्कि यह गरीब और ग्रामीण भारत पर सीधा हमला है। उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा कि वर्तमान मोदी सरकार को “राम से नहीं, बल्कि नाथूराम से प्रेम है।” यह बयान सरकार की मानसिकता को दर्शाता है, जो महात्मा गांधी के नाम और उनके आदर्शों को सार्वजनिक जीवन से हटाना चाहती है।
सुशील कुमार ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीब ग्रामीणों के लिए काम के अधिकार की संवैधानिक गारंटी है। इस कानून के माध्यम से देश के करोड़ों गरीब परिवारों का जीवन चलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर करने के उद्देश्य से नाम बदलने का प्रस्ताव ला रही है, ताकि इसकी मूल भावना को खत्म किया जा सके।
राज्य महासचिव किसान कांग्रेस अशोक कुमार सिंह ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के नाम से गांधी जी का नाम हटाने की कोशिश की गई, तो पार्टी सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी। प्रेसवार्ता में मेराज अहमद, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष सेराज आलम, सशी कुमार और संस्कार यादव मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि महात्मा गांधी का नाम केवल इतिहास नहीं, बल्कि देश की आत्मा है और इसे किसी भी कीमत पर मिटने नहीं दिया जाएगा।






