Memorial Seminar: दहशत के दौर में भी नहीं झुकी कलम: स्व. मुरलीधर शुक्ल की स्मृति में संगोष्ठी

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सीवान की पत्रकारिता की दिशा-दशा पर मंथन, विचारधाराओं की दूरियां भी सिमटीं

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सीवान। जिला अधिवक्ता संघ के सभागार में प्रखर मनीषी और वरिष्ठ पत्रकार स्व. मुरलीधर शुक्ल उर्फ आशा शुक्ल की स्मृति में संगोष्ठी सह व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

वक्ताओं ने कहा कि स्व. शुक्ल ने साधारण जीवन जीते हुए असाधारण कृतित्व रचा। उनकी निर्भीक, निष्पक्ष और गंभीर लेखनी आज भी पत्रकारिता के लिए प्रेरणा है। बदलते समय में सीवान की पत्रकारिता की दिशा पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक मंच पर दिखे, जो उनके समावेशी व्यक्तित्व का प्रमाण रहा।

अध्यक्षीय संबोधन में अवध बिहारी चौधरी ने कहा कि स्व. आशा शुक्ल कठिन परिश्रम, सतत प्रयास और समर्पण के प्रतीक थे। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा कि जब सही बात लिखना भी कठिन था, तब भी उन्होंने अपनी कलम नहीं रोकी। प्रो. अभिमन्यु सिंह ने संवाद को समस्याओं के समाधान का माध्यम बताते हुए उनके जीवन मूल्यों से सीख लेने की बात कही।

कार्यक्रम में डॉ. विजय कुमार पांडेय, आनंद मिश्र और गणेश दत्त पाठक ने भी विचार रखे। डेनियल क्लब की ओर से पौधरोपण किया गया और अतिथियों का स्वागत पौधा देकर किया गया। मंच संचालन राजेश पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन आकाश श्रीवास्तव ने किया।

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निर्भीक पत्रकारिता की विरासत

व्याख्यानमाला का विषय प्रवेश जेडए इस्लामियां पीजी कॉलेज के पूर्व प्राध्यापक डॉ. अशोक प्रियंवद ने कराया। उन्होंने कहा कि दहशत के दौर में भी स्व. शुक्ल ने अपनी लेखनी से समझौता नहीं किया। वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क ने पत्रकारिता के दायित्वों को गंभीरता से निभाने पर बल दिया।

राकेश कुमार ने कहा कि समय बदल सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल मूल्य नहीं। धनंजय मिश्र ने अपने 40 वर्ष पुराने अनुभव साझा करते हुए स्व. शुक्ल के साथ बिताए पलों को याद किया। प्रो. रविन्द्र पाठक ने बताया कि उनकी पुस्तक ‘सोनालिका’ ने पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य किया।

डॉ. सुशीला पांडेय और प्रो. पूजा तिवारी ने पत्रकारिता और हिन्दी के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला।

बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित

कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ अध्यक्ष शंभु दत्त शुक्ल, राहुल तिवारी, उपेन्द्र यादव, प्रो. रीता शर्मा, डॉ. के. एहतेशम अहमद, डॉ. शहनवाज आलम सहित अनेक शिक्षाविद, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। साथ ही प्रो. पारस दत्त शुक्ल और मनोरंजन कुमार सिंह की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

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