Nursing College: सुभवंती स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज सीवान में रिजल्ट को लेकर नर्सिंग छात्रों का जमकर हंगामा, कॉलेज परिसर में तोड़फोड़

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प्रबंधन बोला—परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में

हर विद्यार्थी की समस्या को सक्षम स्तर पर उठाएंगे; छात्रों से शांति और संवाद बनाए रखने की अपील

एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता l सिवान।

सुभवंती स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज, सिवान में शनिवार को बीएससी नर्सिंग 2023 बैच के छात्र-छात्राओं ने हाल ही में घोषित विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम को लेकर जमकर हंगामा किया।

आक्रोशित विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ की। इस दौरान कई पंखे क्षतिग्रस्त होने, परिसर में खड़ी दोपहिया गाड़ियों को नुकसान पहुंचने तथा कंप्यूटर कक्ष और अन्य कमरों के शीशे डंडों से तोड़े जाने की बात सामने आई है।

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स्थिति बिगड़ने पर कॉलेज के शिक्षक भयवश खुद को कमरे के भीतर बंद करने को मजबूर हुए और पुलिस को सूचना दी गई। स्थानीय पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति शांत हुई। विद्यार्थियों का मुख्य कहना था कि किसी भी परिस्थिति में उनका सत्र बर्बाद नहीं होना चाहिए और परीक्षा परिणाम से जुड़ी उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए।

रिजल्ट में शून्य अंक मिलने से बढ़ा आक्रोश

छात्र-छात्राओं का आक्रोश मुख्य रूप से 21 अगस्त को घोषित बीएससी नर्सिंग 2023 बैच के विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम को लेकर था। विद्यार्थियों का आरोप है कि कई छात्रों को अपेक्षा के विपरीत अंक मिले हैं। कुछ विद्यार्थियों ने तो उत्तर पुस्तिका में लिखने के बावजूद शून्य अंक मिलने पर सवाल उठाए।

विद्यार्थियों ने कॉलेज की शैक्षणिक एवं आधारभूत व्यवस्थाओं पर भी असंतोष जताया। उनका आरोप है कि कक्षाओं में लगे प्रोजेक्टर कई बार काम नहीं करते और समस्याओं को लेकर प्रबंधन तक पहुंच बनाने में उन्हें कठिनाई होती है। कुछ छात्रों ने फीस और कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों का दावा है कि बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई के लिए उनसे लाखों रुपये लिए जा रहे हैं, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

हालांकि, इन आरोपों पर कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाएगा और प्रत्येक बिंदु पर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

शिक्षकों से अभद्रता का भी आरोप

हंगामे के दौरान छात्रों को समझाने पहुंचे शिक्षकों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों की नाराजगी और उनकी समस्याओं को समझा जा सकता है, लेकिन किसी भी विवाद का समाधान तोड़फोड़ अथवा शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार से नहीं हो सकता।

प्रिंसिपल बोलीं—शून्य अंक का मामला गंभीर, विश्वविद्यालय के सामने रखेंगे समस्या

सुभवंती स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर सह इंचार्ज प्रिंसिपल सरिता देवी ने कहा कि बीएससी नर्सिंग 2023 बैच का रिजल्ट 21 अगस्त को जारी हुआ है और परिणाम में कई विद्यार्थियों को बेहद कम, यहां तक कि शून्य अंक मिलने की जानकारी सामने आई है।

उन्होंने कहा, “किसी विद्यार्थी को शून्य अंक कैसे मिला, जबकि उसने परीक्षा में कुछ लिखा है, यह जांच का विषय है। वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। कॉलेज प्रबंधन विद्यार्थियों की समस्या को विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखेगा। यदि विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिका में उत्तर लिखा है, तो नियमानुसार उन्हें उचित अंक मिलने की प्रक्रिया के लिए हम पूरी मदद करेंगे।”

प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि परीक्षा आयोजित करने, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय के स्तर से होती है। ऐसे में कॉलेज सीधे तौर पर विद्यार्थियों के अंक निर्धारित नहीं करता।

डायरेक्टर ने आक्रोशित छात्रों से कहा—‘आप हमारे विद्यार्थी ही नहीं, परिवार का हिस्सा हैं’

इस पूरे मामले पर सुभावंती इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन के डायरेक्टर सतीश कुमार राय ने छात्रों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम को लेकर उनकी चिंता, निराशा और आक्रोश को कॉलेज प्रबंधन गंभीरता से समझता है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को विश्वविद्यालय के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को शून्य अंक या अपेक्षा से विपरीत परिणाम मिला है, उनके मामलों को गंभीरता से लेकर नियमानुसार पुनर्मूल्यांकन, री-चेकिंग अथवा उपलब्ध अन्य प्रक्रियाओं के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। जिस किसी भी विद्यार्थी को अपने परिणाम को लेकर संदेह या आपत्ति है, तो हम उसे अकेला नहीं छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम से संबंधित विषय में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परीक्षा का आयोजन, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। कॉलेज प्रबंधन सीधे तौर पर अंक निर्धारित नहीं करता।

डायरेक्टर ने छात्रों से अपील की कि वे अपनी बात मजबूती से रखें, लेकिन शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से। उन्होंने कहा कि कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या शिक्षण व्यवस्था बाधित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसका असर विद्यार्थियों की अपनी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों के साथ स्वयं बैठकर उनकी समस्याएं सुनने और विश्वविद्यालय के समक्ष उचित तरीके से रखने की बात कही। डायरेक्टर ने कहा कि प्रबंधन का उद्देश्य किसी विद्यार्थी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि वास्तविक तथ्यों को सामने लाकर उचित समाधान तक पहुंचना है।

प्रबंधन का संदेश—विरोध नहीं, संवाद से निकलेगा समाधान

कॉलेज प्रबंधन ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और अपनी शिकायतों को प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से सामने रखें। प्रबंधन का कहना है कि परीक्षा परिणाम से जुड़ी आपत्तियों का समाधान निर्धारित विश्वविद्यालयीय प्रक्रिया के तहत कराया जाएगा।

कॉलेज प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, उनका सत्र और भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रहना जरूरी है, ताकि विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कर विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई की ओर वापस लाया जा सके।

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