Indian Cinema: पंजाबी म्यूज़िक से अंतरराष्ट्रीय सिनेमा तक: फिल्ममेकर अंकु पाराशर की दोहरी उड़ान, संगीत और सिनेमा—दोनों माध्यमों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का मनवा रहे लोहा

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‘किथे डरदा’ म्यूज़िक वीडियो और अवॉर्ड-नॉमिनेटेड फिल्म ‘पूस की एक रात’ से बनाई अलग पहचान

गोपालगंज जिले के मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपालपुर गांव से ताल्लुक रखने वाले अंकु पाराशर 2017 से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में हैं सक्रिय

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना:

सिवान/गोपालगंज। कृष्ण मुरारी पांडेय।

स्वतंत्र फिल्ममेकर अंकु पाराशर इन दिनों संगीत और सिनेमा—दोनों माध्यमों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उनका हालिया पंजाबी म्यूज़िक वीडियो ‘किथे डरदा’ जहां भावनाओं को छू रहा है, वहीं उनकी लॉन्ग शॉर्ट फिल्म ‘पूस की एक रात’ अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवलों में सराहना और पुरस्कार हासिल कर रही है। ग्रामीण बिहार से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुंची उनकी यह यात्रा नई पीढ़ी के फिल्ममेकर्स के लिए प्रेरणा बन रही है।

जुदाई और तड़प की भावनात्मक कहानी है ‘किथे डरदा’
पंजाबी म्यूज़िक वीडियो ‘किथे डरदा’ जुदाई, तड़प और टूटे रिश्तों के दर्द को बेहद संवेदनशील ढंग से पेश करता है। गायक कंवलप्रीत सिंह की भावपूर्ण आवाज़, राही राणा के बोल और माने का संगीत इस गाने को खास बनाते हैं। अंकु पाराशर के निर्देशन में बना यह वीडियो सिनेमाई गहराई के साथ भावनाओं को उभारता है। वीडियो की सिनेमैटोग्राफी संतोष गुप्ता ने की है, जबकि निर्माता मानव यादव और सह-निर्माता VVidnet Media Production LLP हैं। माउंटेन प्रोडक्शन के बैनर तले बना यह गाना Vvidnet Music लेबल से रिलीज़ हुआ है।

‘पूस की एक रात’: प्रेमचंद की कहानी का डिस्टोपियन पुनर्पाठ
अंकु पाराशर की लॉन्ग शॉर्ट फिल्म ‘पूस की एक रात’ मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘पूस की रात’ से प्रेरित है, जिसे महामारी के बाद की दुनिया में नए संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की कहानी एक अनजान वायरस के फैलने के एक साल बाद शुरू होती है, जहां इंजीनियर अंकुर शर्मा अकेलेपन, डर और अपराधबोध के बीच जीवन और मृत्यु से जूझता है। रेडियो पर प्रेमचंद की कहानी, बीती यादें और रहस्यमयी दस्तक—फिल्म दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और पुरस्कार
‘पूस की एक रात’ को ग्रेट दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में बेस्ट शॉर्ट फिल्म के लिए नॉमिनेशन मिला है। इसके अलावा स्पेन, अमेरिका, इटली और जमैका के कई प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवलों में इसे ऑफिशियल सिलेक्शन और ऑनरेबल मेंशन जैसे सम्मान प्राप्त हुए हैं।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से सिनेमा तक का सफर
अंकु पाराशर मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपालपुर गांव के रहने वाले हैं। वह स्वर्गीय अजय कुमार सिंह के पुत्र हैं, जो पेशे से किसान थे। पिता के संघर्षपूर्ण जीवन, ईमानदारी और ज़मीनी मूल्यों का गहरा असर अंकु पाराशर की सोच और उनकी कहानी कहने की शैली में साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि उनके सिनेमा में आम आदमी की पीड़ा, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएं प्रमुख रूप से उभरकर सामने आती हैं।

बॉलीवुड में अनुभव, बड़े नामों के साथ काम
वर्ष 2017 से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय अंकु पाराशर ने कई बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में असिस्टेंट डायरेक्टर और एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री के कई नामचीन फिल्ममेकर्स और क्रिएटिव टीमों के साथ काम करने का अवसर मिला। वह तन्मय नाग, जयंत गिलटार, मनोहर अय्यर और अनुराग कश्यप से जुड़ी टीमों के साथ भी काम कर चुके हैं। इस अनुभव ने उनकी फिल्ममेकिंग को तकनीकी मजबूती के साथ-साथ कंटेंट के स्तर पर भी परिपक्व बनाया है।

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