सन्नी गुप्ता, अंकुर सिंह और सत्येन्द्र कुमार—तीनों ठेकेदार—और भोलू साह (राजा राम) व कृष्णा साह—दोनों वार्ड पार्षद पर लगा है पंजी से छेड़छाड़ का आरोप
वीडियो जांच में ठेकेदार और वार्ड पार्षद दोषी, कर्मचारियों को मिली क्लीन चिट
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
कृष्ण मुरारी पांडेय। सीवान। नगर परिषद सीवान में हंगामा करने और सरकारी संचिकाओं व अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने सख्त रुख अपनाया है। वीडियो क्लिप की संयुक्त जांच के बाद दोषी पाए गए तीन ठेकेदारों और दो वार्ड पार्षदों के खिलाफ अविलंब प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया है। वहीं, जांच में नगर परिषद के दो कर्मचारियों को पूरी तरह निर्दोष पाया गया है।
वीडियो क्लिप से खुली पोल
यह पूरा मामला नगर परिषद कार्यालय में हुए हंगामे और निर्गत पंजी में गलत प्रविष्टियों से जुड़ा है। इस संबंध में सामने आए वीडियो क्लिप की जांच अपर समाहर्ता सीवान और जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी द्वारा की गई। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वीडियो साक्ष्य के आधार पर गंभीर अनियमितता और दबाव की पुष्टि होती है।
कौन-कौन पाए गए दोषी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सन्नी गुप्ता, अंकुर सिंह और सत्येन्द्र कुमार—तीनों ठेकेदार—और भोलू साह (राजा राम) व कृष्णा साह—दोनों वार्ड पार्षद—ने मिलकर सरकारी संचिकाओं/अभिलेखों और निर्गत पंजी के साथ छेड़छाड़ की। आरोप है कि इन लोगों ने विभिन्न योजनाओं में गलत प्रविष्टि कराने के लिए नगर परिषद के सहायक राजा कुमार मांझी को धमकाया।
धमकी देकर कराई गई गलत एंट्री
जांच में सामने आया कि सहायक राजा कुमार मांझी को हाथ-पैर तोड़ने और नौकरी से हटवाने की धमकी देकर निर्गत पंजी में गलत प्रविष्टियां कराई गईं। यह कृत्य गंभीर प्रशासनिक अपराध की श्रेणी में आता है। हालांकि बाद में नगर प्रबंधक की मौजूदगी में गलत प्रविष्टियों को काटकर पंजी जमा करा दिया गया।
कर्मचारियों को मिली राहत
संयुक्त जांच में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस पूरे प्रकरण में सहायक राजा कुमार मांझी और योजना सहायक विजय पासवान की कोई संलिप्तता नहीं है। दोनों पर दबाव बनाकर काम कराया गया था। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि यह लिखित सूचना अनुसंधान पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्दोष कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।
डीएम का सख्त निर्देश
जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि उपर्युक्त पांचों व्यक्तियों के खिलाफ स्थानीय थाना में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए और इसका अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित किया जाए। डीएम ने मामले को “गंभीर प्रकृति” का बताते हुए कानून के तहत कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
प्रशासनिक सख्ती का संकेत
इस कार्रवाई से यह साफ है कि जिला प्रशासन सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ और दबाव बनाकर गलत काम कराने जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा। वीडियो साक्ष्य के आधार पर की गई इस कार्रवाई को प्रशासनिक पारदर्शिता और सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।






