Siwan: श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है : श्याम किशोरी

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महाराजगंज में शतचंडी महायज्ञ : बड़ी देवी मंदिर के वार्षिकोत्सव पर चल रहे शतचंडी महायज्ञ का तीसरा दिन

वृंदावन की कथावाचिका का ओजपूर्ण प्रवचन, भक्ति-ज्ञान से मुक्ति का बताया मार्ग

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता। महाराजगंज।
अनुमंडल मुख्यालय के दुर्गा चौक नखास स्थित बड़ी देवी मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रीधाम वृंदावन से पधारीं प्रसिद्ध कथावाचिका श्याम किशोरी जी ने अपने ओजपूर्ण, भावनात्मक एवं संगीतमय प्रवचन से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

प्रवचन के दौरान कथावाचिका ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा स्वयं साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप है। भागवत कथा में सहभागी होने से मनुष्य को ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। जब अंतर्मन में ज्ञान का प्रकाश फैलता है, तो जीवन के दुर्गुण स्वतः समाप्त होने लगते हैं और मानव का कल्याण सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की रोशनी से अंतरात्मा में प्रकाश का अनुभव होता है, जिससे सांसारिक बंधनों से स्वतः मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

श्याम किशोरी जी ने कहा कि जिस स्थान पर भगवान का नाम नियमित रूप से लिया जाता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वतः निवास करती है। दुखों से मुक्ति का एकमात्र उपाय ईश्वर का भजन, कीर्तन और स्मरण है। उन्होंने व्यावहारिक जीवन से जुड़ी बात कहते हुए बताया कि यदि व्यक्ति संसार का सुख चाहता है, तो भगवान की आशा छोड़नी होगी और यदि भगवान की भक्ति करनी है, तो संसार की आशा छोड़नी होगी। दोनों एक-दूसरे के विरोधी हैं, क्योंकि संसार नाशवान है और भगवान अविनाशी। नाशवान वस्तुओं में लिप्त रहकर अविनाशी की प्राप्ति संभव नहीं है।

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कथावाचिका ने भागवत कथा कराने से प्राप्त होने वाले पुण्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस घर में भागवत, गीता और रामायण का वास नहीं होता, वह घर वास्तव में घर कहलाने योग्य नहीं होता। भागवत कथा पापों को धोने वाला सरल और सुगम मार्ग है, जो जीवन को निर्मल बनाता है। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान के दर्शन के लिए केवल मंदिरों में जाना आवश्यक नहीं है। जब मनुष्य श्रद्धा और विश्वास के साथ ईश्वर की भक्ति करता है, तो भगवान स्वयं मनुष्य के हृदय में प्रकट होकर दर्शन देते हैं। एकाग्रचित होकर कथा का रसपान करने वाले भक्त सांसारिक चक्र से मुक्त हो जाते हैं और उन्हें जीवन के परम उद्देश्य की प्राप्ति होती है।

कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। आयोजन को सफल बनाने में यज्ञ समिति एवं स्थानीय श्रद्धालुओं की सक्रिय भूमिका रही। महायज्ञ के आगामी दिनों में भी विभिन्न संत-महात्माओं के प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठान होंगे, जिससे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहेगा।

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