Siwan: खान अब्दुल गफ्फार खान की जयंती पर संगोष्ठी, वक्ताओं ने कहा– अहिंसा और भाईचारा ही आज के भारत की जरूरत

Share

सीवान में गांधी और सरहदी गांधी की विरासत पर मंथन

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सीवान।
जनवादी लेखक संघ, ऐप्सो और खुदाई खिदमतगार बिहार के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को दरोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज के सभागार में “गांधी, सरहदी गांधी की विरासत और आज का भारत” विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सरहदी गांधी कहे जाने वाले खान अब्दुल गफ्फार खान की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने किया। उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम संयोजक डॉ. ख्वाजा एहतेशाम अहमद, कार्यक्रम अध्यक्ष युगल किशोर दुबे, मार्कण्डेय दीक्षित, प्रोफेसर उपेंद्र यादव, पूर्व प्राचार्य रामसुंदर चौधरी तथा खुदाई खिदमतगार के चांद शेख ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी की शुरुआत की।

नैतिक और बौद्धिक पतन पर चिंता
विषय प्रवेश कराते हुए डॉ. ख्वाजा एहतेशाम अहमद ने देश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम विश्व के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के साथ सम्मान से लिया जाता था, लेकिन आज देश के प्रधानमंत्री का नाम एप्सटीन जैसे कुख्यात व्यक्ति के संदर्भ में लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे देश के नैतिक और बौद्धिक पतन का संकेत बताया।

डॉ. एहतेशाम ने सरहदी गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में लगभग तीस वर्ष अंग्रेजों की जेलों में बिताए। आज़ादी के बाद भी उन्हें पाकिस्तान में करीब पंद्रह वर्षों तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि गफ्फार खान का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने पठानों जैसी जुझारू और लड़ाकू मानी जाने वाली कौम को अहिंसा के मार्ग पर संगठित किया।

आज भी प्रासंगिक हैं गांधी के विचार
मुख्य वक्ता अवध बिहारी चौधरी ने कहा कि गांधी और सरहदी गांधी की विचारधारा आज के भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। लोकतंत्र को मजबूत करने, सामाजिक न्याय स्थापित करने और समाज में भाईचारे की भावना बढ़ाने के लिए गांधीवादी मूल्यों को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि नफरत और विभाजन की राजनीति से देश को बचाने का रास्ता गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों से होकर ही जाता है।

वक्ताओं ने रखे विचार
संगोष्ठी में प्रोफेसर प्रियरंजन, प्रोफेसर स्वामित्र कुमार, प्रोफेसर संजय दुबे, प्रोफेसर डॉ. उबैद, प्रोफेसर भारत प्रसाद, प्रोफेसर इंद्रजीत चौधरी, प्रोफेसर प्रदीप कुमार, रवींद्र सिंह, प्रोफेसर वीरेंद्र यादव, प्रोफेसर तारिक महमूद, अमित कुशवाहा, शशि भूषण कुमार, मेराज अहमद, मोहम्मद सादिक, डॉ. मुमताज, अरशद सिवानी, इंजीनियर रमेश, सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ यादव, एहतेशाम अहमद उर्फ राजू और गणेश पाठक ने अपने विचार साझा किए।

इरशाद अहमद ने कहा कि सरहदी गांधी देश के विभाजन के घोर विरोधी थे और वे आजीवन हिंदू–मुस्लिम एकता के पक्षधर रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान दौर में अहिंसा, सत्य और साहस ही समाज और लोकतंत्र को मजबूत कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में ऐप्सो के जिला उपाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय सुभाषकर पांडे के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728