KMP भारत डिजिटल की खबर के बाद राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
जदयू ने प्रदेश सचिव संगीता यादव(संगीता देवी) को प्राथमिक सदस्यता से किया मुक्त
दल-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का पत्र में उल्लेख
पॉलिटिकल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान।
सिवान की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चर्चा में चल रहे एक राजनीतिक घटनाक्रम ने अब नया मोड़ ले लिया है। जनता दल यूनाइटेड ने अपनी प्रदेश सचिव एवं सिवान की जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती संगीता यादव (संगीता देवी) के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी निष्कासन पत्र के अनुसार उन्हें छह वर्षों के लिए दल से निष्कासित किया गया है।

जदयू प्रदेश कार्यालय, वीरचंद पटेल पथ, पटना से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशानुसार संगीता यादव को “दल-विरोधी कार्यों में संलिप्त पाए जाने के कारण” पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करते हुए छह वर्षों के लिए दल से निष्कासित किया जाता है। पत्र पर प्रदेश महासचिव सह मुख्यालय प्रभारी शंभु कुशवाहा के हस्ताक्षर हैं। पत्र में संगीता यादव (संगीता देवी) को प्रदेश सचिव तथा जिला-सिवान से संबंधित पदाधिकारी के रूप में उल्लेखित किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब सिवान की राजनीति में संगीता यादव के परिवार से जुड़ा एक अलग राजनीतिक समीकरण पहले से चर्चा में था।
एक घर, दो दल और फिर संगठन का बड़ा फैसला
हाल ही में KMP भारत डिजिटल ने सिवान की राजनीति में चर्चा का विषय बने उस समीकरण को प्रमुखता से उठाया था, जिसमें संगीता यादव (संगीता देवी) की राजनीतिक भूमिका और उनके पति प्रो. जयराम यादव की राजद से जुड़ी नई राजनीतिक भूमिका सामने आई थी। प्रो. जयराम यादव को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद का एमएलसी प्रत्याशी बनाए जाने के बाद यह सवाल राजनीतिक चर्चा का विषय बना कि एक ही परिवार में दो अलग-अलग राजनीतिक धाराएं किस तरह काम कर रही हैं।

इससे पहले सिवान की जिला परिषद राजनीति में संगीता यादव की मजबूत स्थिति भी सार्वजनिक रिकॉर्ड में सामने आती रही है। जनवरी 2022 में वे लगातार दूसरी बार जिला परिषद अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं। उस चुनाव में उन्हें 22 मत मिले थे, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी आशा देवी को 17 मत मिले थे। उस समय संगीता यादव को जदयू से जुड़ी नेता के रूप में रिपोर्ट किया गया था।
यही पृष्ठभूमि मौजूदा घटनाक्रम को महज एक संगठनात्मक कार्रवाई से आगे ले जाकर सिवान के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।
जिस परिवार की राजनीतिक भूमिका चर्चा में थी, अब उसी पर संगठनात्मक कार्रवाई
कुछ दिन पहले तक चर्चा इस बात की थी कि एक ही परिवार में पति-पत्नी की राजनीतिक भूमिकाएं अलग-अलग दलों से जुड़ी हुई हैं। अब जदयू के निष्कासन आदेश ने इस पूरे घटनाक्रम में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
प्रो. जयराम यादव ने पूर्व में इस राजनीतिक चर्चा पर कहा था कि उन्होंने हमेशा शिक्षकों की सेवा की है और शिक्षकों के साथ रहे हैं। वहीं संगीता यादव की ओर से कहा गया था कि आगे पार्टी की ओर से जो आदेश होगा, वह उसका पालन करेंगी।
अब जदयू की ओर से जारी निष्कासन पत्र के बाद राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बदल गया है। सवाल यह है कि इस कार्रवाई का सिवान की जिला परिषद की राजनीति और स्थानीय संगठन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
हालांकि, केवल निष्कासन पत्र के आधार पर कार्रवाई के पीछे किसी विशेष राजनीतिक कारण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पार्टी के आधिकारिक पत्र में कारण के रूप में दल-विरोधी कार्यों में संलिप्तता का ही उल्लेख किया गया है। पत्र में किसी एक विशेष घटना, बयान या व्यक्ति का नाम कारण के रूप में नहीं दिया गया है।
जदयू के लिए संगठनात्मक संदेश भी
राजनीतिक दलों में अनुशासन का सवाल हमेशा महत्वपूर्ण रहता है। ऐसे में प्रदेश स्तर के पदाधिकारी के खिलाफ छह वर्ष का निष्कासन केवल व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं, बल्कि संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर पार्टी की स्थिति का भी संकेत माना जा सकता है।

सिवान में जदयू की संगठनात्मक गतिविधियां पहले से सक्रिय रही हैं। हाल की एक रिपोर्ट में जिले में एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय और संगठन की एकजुटता पर जोर दिए जाने का उल्लेख है। उस कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष संगीता यादव सहित जदयू के कई नेता मौजूद थे।
ऐसे में उसी संगठन से अब उनका निष्कासन स्थानीय राजनीतिक हलकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
जिला परिषद की राजनीति पर भी निगाह
संगीता यादव की राजनीतिक पहचान केवल जदयू के प्रदेश पदाधिकारी के रूप में नहीं रही है। वे जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में भी प्रभावशाली भूमिका में रही हैं। लगातार दो बार जिला परिषद अध्यक्ष चुने जाने का रिकॉर्ड उनके स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
अब जदयू से छह वर्ष के निष्कासन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि जिला परिषद की राजनीति में उनकी भूमिका किस रूप में आगे बढ़ती है। क्या वे अपने पद पर बनी रहेंगी? क्या पार्टी के साथ संबंधों में आगे कोई नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आएगा? या सिवान की स्थानीय राजनीति में कोई नया समीकरण आकार लेगा—इन सवालों पर आने वाले दिनों में नजर रहेगी।
जयराम यादव की राजद भूमिका से जुड़ा नया कोण
इस घटनाक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष प्रो. जयराम यादव की राजद से जुड़ी राजनीतिक भूमिका है। KMP भारत डिजिटल की पूर्व रिपोर्ट में इसी परिवार को सिवान में जदयू और राजद के अलग-अलग राजनीतिक जुड़ाव के कारण चर्चा में बताया गया था।
अब जदयू की कार्रवाई के बाद स्वाभाविक रूप से राजनीतिक गलियारों में इस पुराने घटनाक्रम की फिर चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन दोनों घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध पार्टी के निष्कासन पत्र में दर्ज नहीं है। इसलिए इसे राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए, तथ्य के रूप में नहीं।
पार्टी से छह साल का निष्कासन, आगे क्या?
जदयू के आदेश ने फिलहाल संगीता यादव के सामने राजनीतिक रूप से एक नई परिस्थिति खड़ी कर दी है। छह वर्षों का निष्कासन लंबी अवधि का संगठनात्मक निर्णय है। अब उनकी अगली राजनीतिक दिशा, जिला परिषद में उनकी भूमिका और सिवान की स्थानीय राजनीति में उनके समर्थकों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।
सिवान की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पंचायत एवं जिला परिषद स्तर की राजनीति का प्रभाव व्यापक सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा रहता है। संगीता यादव का दो बार जिला परिषद अध्यक्ष चुना जाना इस बात का संकेत रहा है कि उनके पास स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आधार रहा है।
दल-विरोधी गतिविधियों के कारण संगीता यादव निष्कासित : जीशु सिंह
जदयू के जिला अध्यक्ष विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह ने कहा कि श्रीमती संगीता यादव (संगीता देवी) को दल-विरोधी कार्यों में संलिप्त पाए जाने के कारण पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करते हुए छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के निर्देश के अनुसार यह कार्रवाई की गई है।
अब जदयू से निष्कासन के बाद वही राजनीतिक आधार किस दिशा में जाता है, यह आने वाला समय तय करेगा।
फिलहाल तस्वीर साफ है—जदयू ने प्रदेश सचिव संगीता यादव (संगीता देवी) को छह वर्षों के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है। पत्र में कार्रवाई का आधार दल-विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता बताया गया है। दूसरी ओर, कुछ ही दिन पहले उनके परिवार के राजनीतिक समीकरण को लेकर उठी चर्चा ने सिवान की राजनीति में पहले से ही नई बहस छेड़ रखी थी। ऐसे में यह निष्कासन उस बहस को और गहरा करने वाला घटनाक्रम जरूर बन गया है।






