कैशलेस पॉलिसी के बावजूद नहीं मिला था ₹8,970 का भुगतान, इजराय वाद के बाद कंपनी ने ₹12,332 चुकाए
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

विधि संवाददाता l सिवान l
सिवान जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के राजपुर गांव निवासी अधिवक्ता अमित कुमार सिंह की कार के बीमा क्लेम से जुड़े मामले में उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने शेष राशि का भुगतान कर दिया। आयोग के आदेश के बावजूद निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने आदेश के अनुपालन के लिए इजराय वाद दायर किया था। इसके बाद बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत गणना के आधार पर ₹12,332 का भुगतान किया।
जानकारी के अनुसार, 7 अगस्त 2018 को अमित कुमार सिंह की टाटा टियागो कार तरवारा मोड़ के समीप दुर्घटनाग्रस्त होकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। वाहन को मरम्मत के लिए 8 अगस्त 2018 को उर्मिला ऑटोमोबाइल में दिया गया। मरम्मत के बाद 24 अगस्त 2018 को एजेंसी ने वाहन वापस कर दिया। एजेंसी की ओर से मरम्मत के मद में ₹27,164 का बिल दिया गया था।
उस समय वाहन नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था। बीमा पॉलिसी की वैधता 15 फरवरी 2018 से 14 फरवरी 2019 तक थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, पॉलिसी कैशलेस होने के बावजूद बीमा कंपनी की ओर से मरम्मत खर्च की ₹8,970 की राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अमित कुमार सिंह ने उपभोक्ता आयोग में बीमा कंपनी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और दावों का परीक्षण किया। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को ₹8,970 की राशि तथा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए ₹2,000, यानी कुल ₹10,970 का भुगतान आदेश की तिथि से दो माह के भीतर करने का निर्देश दिया।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने पर ₹8,970 पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर शिकायतकर्ता ने आयोग के आदेश के अनुपालन के लिए इजराय वाद दायर किया।
इजराय वाद की कार्रवाई के दौरान आयोग के कड़े रुख के बाद विपक्षी बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत गणना के आधार पर ₹12,332 का भुगतान कर दिया। भुगतान प्राप्त होने के बाद शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष राशि प्राप्त होने की स्वीकृति दी और वाद के निष्पादन का अनुरोध किया।
आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद एवं सदस्य मनमोहन कुमार के समक्ष भुगतान की पुष्टि के बाद शिकायतकर्ता के अनुरोध पर इजराय वाद का निष्पादन करते हुए मामला समाप्त कर दिया गया।






