सहरसा में किसान-मजदूरों का प्रतिरोध मार्चसरकारी नीतियों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

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डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l भागलपुर

सहरसा | संवाददाता– विकास कुमार
संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बैनर तले बुधवार को सहरसा में किसान-मजदूरों ने जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला। वीर कुंवर सिंह चौक से शुरू हुआ यह मार्च मुख्य मार्गों से गुजरते हुए समाहरणालय पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भीड़ में शामिल किसान-मजदूरों ने कहा कि वे सरकार के “जन-विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक” फैसलों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे।


सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर आपत्ति, कहा— जनता के हितों से खिलवाड़

नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार सरकारी संपत्तियों का निजीकरण कर रही है, जिससे आम लोगों की सुविधाएं प्रभावित होंगी। मजदूर संगठनों का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार तत्काल निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाए और जन-उन्मुख नीतियों को लागू करे।


कृषि कानूनों को लेकर फिर गरजे किसान, बोले— ‘जमीन छीनने की साजिश’

मार्च के दौरान CPI नेता ओमप्रकाश ने कहा कि नए कृषि कानून किसानों की जमीन कॉरपोरेट के हवाले करने का प्रयास हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है, जिससे किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बनकर रह जाएंगे। कहा कि “किसानों की खेती-किसानी सुरक्षित रहे, यह हमारी सबसे बड़ी मांग है,”


पांच साल पुराने समझौते की याद दिलाई, कहा— वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं

किसान सभा के महामंत्री बिनोद कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा पांच वर्ष पहले किए गए कई महत्वपूर्ण वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया कि फसल की उचित कीमत, कर्ज माफी और बीमा राशि के भुगतान जैसे मुद्दे आज भी अधूरे हैं।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, आगे भी संघर्ष का एलान

प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें कृषि कानूनों को वापस लेने, निजीकरण पर रोक और मजदूर-किसानों के लिए कल्याणकारी नीतियां लागू करने की मांग रखी गई।
नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन का दायरा और बड़ा किया जाएगा।

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