मनरेगा से गांव-गांव बनेंगे खेल मैदान, ओलंपिक- कॉमनवेल्थ के आयोजन की मांग तेज; विशेषज्ञों के मंथन से तय होगी नई खेल नीति
सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संजीव कुमार। पटना।
राजधानी पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित बिहार स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2026 ने राज्य को देश के उभरते स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित करने की मजबूत नींव रख दी है। खेल विभाग, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और स्पोर्ट्स स्टार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, जिसके बाद बिहार के खिलाड़ियों की उपलब्धियों और सरकार की पहल पर आधारित एक प्रेरणादायक फिल्म दिखाई गई। अतिथियों का पारंपरिक सम्मान भी किया गया।
अपने संबोधन में रक्षा खडसे ने कहा कि बिहार प्रतिभाओं की धरती है, जरूरत है उन्हें सही दिशा देने की। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत गांव-गांव में खेल मैदान बनाने की योजना को अब केंद्र सरकार ने भी अपनाया है। इससे ग्रामीण स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ शारीरिक विकास नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व और समय प्रबंधन भी सिखाता है।
खडसे ने ‘खेलो इंडिया’ जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश में मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें बिहार की भूमिका अहम होगी। उन्होंने स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
वहीं, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार में खेलों के विकास के लिए आधारभूत संरचना पर तेजी से काम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम तैयार हो चुके हैं और अब जरूरत है बड़े टूर्नामेंट्स के आयोजन की। उन्होंने केंद्र से मांग की कि 2036 ओलंपिक या कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ मुकाबले बिहार में भी आयोजित किए जाएं।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह सीईओ रवीन्द्रण शंकरण ने कहा कि “बिहार इतिहास लिखता नहीं, रचता है।” उन्होंने बताया कि राज्य में खेलों के विकास को लेकर नई रणनीति तैयार की जा रही है, जिसमें मेडल जीतने वाले खेलों पर विशेष फोकस होगा।
सुबह 10 बजे से शाम तक चले कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों के दौरान खेल निर्माण, ओलंपिक होस्टिंग, स्पोर्ट्स गवर्नेंस, शिक्षा और खेल के तालमेल जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने के लिए ठोस सुझाव दिए।
इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए शीर्ष अधिकारी, कोच, ओलंपियन और खेल प्रशासकों ने भाग लिया। इनमें अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद, डोला बनर्जी, जॉयदीप करमाकर सहित कई दिग्गज शामिल रहे।






