Saran: वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे: एकमा में छात्रों ने गूंजाया देशभक्ति का स्वर

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रामाधार सिंह टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में एनएसएस इकाई की ओर से हुआ सामूहिक राष्ट्रगीत गायन कार्यक्रम

बिहार डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l पटना

एकमा (सारण)। संवाददाता – कमल सिंह सेंगर: – राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शनिवार को एकमा स्थित रामाधार सिंह टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज देशभक्ति के सुरों से गूंज उठा। अवसर था राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा आयोजित सामूहिक राष्ट्रगीत गायन कार्यक्रम का, जिसमें कॉलेज के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने एक स्वर में “वंदे मातरम्” का गान कर देशप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. अनूप कुमार एवं प्रो. हरीशंकर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय कुमार मिश्र, सचिव ई. जयप्रकाश सिंह तथा अन्य गणमान्य शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद पूरे परिसर में ‘वंदे मातरम्’ के गगनभेदी स्वर गूंज उठे।

प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय कुमार मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा है, जो हमें मातृभूमि के प्रति समर्पण, त्याग और एकता की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों के लिए ऊर्जा का स्रोत बना था, और आज भी देशभक्ति की भावना को जीवित रखता है।

कॉलेज के सचिव ई. जयप्रकाश सिंह ने राष्ट्रगीत को भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ हमारे गौरवशाली इतिहास की जीवंत धरोहर है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को देश की जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में एनएसएस के स्वयंसेवकों ने “माँ तुझे सलाम”, “जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी” जैसे नारों से माहौल को और अधिक देशभक्ति से भर दिया। कॉलेज परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगीत के साथ तिरंगे के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

इस अवसर पर प्रो. सुजीत कुमार, प्रो. अजीत कुमार, प्रो. अमित कुमार, प्रो. कंचन भारती, संतोष कुमार, नागेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों ने भी भाग लिया। सभी ने एकमत होकर कहा कि राष्ट्रगीत का 150वां वर्ष भारतीय अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ हुआ, जिसके बाद पूरे परिसर में “भारत माता की जय” के जयघोष गूंज उठे।

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