पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण, वक्ताओं ने कहा—जड़ों से जुड़ने का संदेश देती है कृति
डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता l (सिवान):
सिवान के समीप स्थित उखईं गांव रविवार को साहित्य और संस्कृति का संगम बन गया, जब प्रसिद्ध लेखक शांता नंद मिश्र की बहुचर्चित पुस्तक “गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती” का भव्य विमोचन गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गांव की सादगी, परंपरा और भावनाओं की गूंज साफ तौर पर महसूस की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव उपस्थित रहे, जिनके साथ कई प्रबुद्ध और सम्मानित व्यक्तित्वों ने मंच की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में प्रो. अशोक प्रियंबद, विजय पांडेय, त्रिलोकी नाथ मिश्रा, गौरी शंकर द्विवेदी, ताप्ती वर्मा, कृष्णा सिंह, गणेश दत्त पाठक, रूपेश कुमार और निक्कू दुबे सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।

वक्ताओं ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि गांव की उस सोंधी महक का जीवंत दस्तावेज है, जो हर उस व्यक्ति को भीतर तक छूती है, जिसने अपने गांव और अपनी मिट्टी से जुड़ाव महसूस किया है। उन्होंने कहा कि लेखक ने अपने अनुभवों, संघर्षों और जीवन मूल्यों को बेहद सरल, सहज और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया है, जो पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

कार्यक्रम के दौरान लेखक शांता नंद मिश्र के व्यक्तित्व और उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभवों की भी चर्चा हुई। उन्होंने जेएनयू, दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टफोर्ड से प्रबंधन एवं वित्त की पढ़ाई की और पिछले दो दशकों से वैश्विक स्तर की प्रतिष्ठित प्रबंधन व आईटी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी वैश्विक दृष्टि और भारतीय जड़ों से जुड़ाव इस पुस्तक में स्पष्ट रूप से झलकता है।
इस अवसर पर बड़हरिया विधायक इंद्रदेव पटेल, जदयू जिलाध्यक्ष विकास कुमार सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष राहुल तिवारी सहित कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। साथ ही सिवान ब्लड डोनर क्लब की टीम की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने लेखक को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पुस्तक समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी।






