सुबह 7 बजे स्कूल से निकली बस, शाम 7 बजे सभी बच्चे सुरक्षित लौटे; प्रिंसिपल दीप्ति सिंह की मौजूदगी में शिक्षिकाओं ने रखा बच्चों का विशेष ध्यान
एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
सिवान। बचपन प्ले स्कूल और आरएमपीएस स्कूल के बच्चों के लिए रविवार का दिन उत्साह और सीख से भरा रहा। दिनांक 8 मार्च 2026 को स्कूल के बच्चों को एक शैक्षिक भ्रमण (एजुकेशनल टूर) पर पटना ले जाया गया, जहाँ उन्होंने पटना म्यूज़ियम का अवलोकन कर इतिहास, संस्कृति और प्राचीन धरोहरों से जुड़ी कई नई जानकारियाँ प्राप्त कीं। इस भ्रमण में बच्चों के साथ स्कूल की शिक्षिकाएँ भी मौजूद रहीं, जिन्होंने पूरे समय बच्चों की सुरक्षा और देखभाल का विशेष ध्यान रखा।

यह शैक्षिक यात्रा सुबह 7 बजे स्कूल परिसर से शुरू हुई। बस में सवार बच्चों के चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था। रास्ते भर बच्चों ने गीत-संगीत और हंसी-मजाक के साथ यात्रा का आनंद लिया। इस दौरान शिक्षिकाएँ भी बच्चों को अनुशासन और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक बातें समझाती रहीं।
पटना पहुँचने के बाद बच्चों को पटना म्यूज़ियम घुमाया गया। संग्रहालय में रखी गई ऐतिहासिक मूर्तियाँ, प्राचीन सिक्के, हथियार, शिलालेख और विभिन्न कालखंडों से जुड़ी वस्तुएँ देखकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए। शिक्षिकाओं ने बच्चों को इन वस्तुओं के महत्व और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक कहानियों के बारे में विस्तार से बताया, जिससे बच्चों को इतिहास को समझने का बेहतर अवसर मिला।

इस अवसर पर स्कूल की प्रिंसिपल दीप्ति सिंह भी उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इस तरह के शैक्षिक भ्रमण बेहद जरूरी होते हैं। इससे बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया को समझने और नई चीज़ें सीखने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की भावना को बढ़ाना था, ताकि वे इतिहास और संस्कृति के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकें।
पूरे दिन म्यूज़ियम और आसपास के स्थलों का भ्रमण करने के बाद शाम 7 बजे सभी बच्चे सुरक्षित स्कूल वापस लौट आए। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर पूरे दिन की खुशी और नए अनुभवों की झलक साफ दिखाई दे रही थी।

यह शैक्षिक भ्रमण बच्चों के लिए न सिर्फ मनोरंजक रहा, बल्कि ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव भी साबित हुआ। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी मिल सके।






