Siwan Big Controversy : प्रेस वार्ता में मंगल पांडेय के बयान पर मचा घमासान, जन सुराज नेता इष्ट देव तिवारी का पलटवार: “जंगलराज के कप्तान अब मंत्री जी के प्रिय हैं”

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स्टेट डेस्क, केएमपी भारत। पटना


कृष्ण मुरारी पांडेय। सीवान

बिहार प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को लेकर बुधवार को सीवान के जिला अतिथि गृह में दिए गए बयान पर सियासी घमासान मच गया है। सिवान के जिला अतिथि गृह में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान जन सुराज पार्टी के राज्य कोर कमेटी सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता इष्ट देव तिवारी ने मंत्री के बयान पर तीखा हमला बोला।

“स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का बयान तथ्यहीन और भ्रामक”

इष्ट देव तिवारी ने कहा कि मंत्री मंगल पांडेय जी का यह कथन कि “लालू राज में नेताओं के घर अपराधी पलते थे”, पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने जंगलराज में अपराध किया, वे सभी आज भाजपा में मंत्री मंगल पांडेय जी के कप्तान बनकर बैठे हैं।

“बीस वर्षों में क्या किया मंगल पांडेय जी ने?”

तिवारी ने तीखे शब्दों में कहा कि बीते बीस वर्षों में अपराध पर मंगल पांडेय जी ने कोई नियंत्रण नहीं किया। यदि तुलनात्मक दृष्टि से आंकलन किया जाए तो लालू शासनकाल की अपेक्षा पिछले दस वर्षों में सिवान में कहीं अधिक संगीन अपराध हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के अपराधों की जिम्मेदारी स्वयं मंत्री जी लेंगे?

“कभी जंगलराज के खिलाड़ी, आज मंचासीन मंत्री के करीबी”

इष्ट देव तिवारी ने प्रेसवार्ता मंच पर विराजमान नेताओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज जो लोग मंत्री महोदय के बगल में कुर्सियों पर बैठे हैं, वही लोग कभी जंगलराज के कप्तान हुआ करते थे। आज वे मंत्री जी के प्रिय बन गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जंगलराज की आलोचना करने वाले मंत्री आज उन्हीं के साथ कैसे खड़े हैं?

“क्या मंगल पांडेय जी में है हिम्मत, कि ले सकें जिम्मेदारी?”

तिवारी ने चुनौती देते हुए कहा कि क्या मंगल पांडेय जी में इतना आत्मबल है कि वे वर्त्तमान दिनों में हो रहे अपराधों की जिम्मेदारी खुले मंच से स्वीकार करें? यदि नहीं, तो उन्हें दूसरों पर दोषारोपण करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ तुलना कर लेने से सच्चाई नहीं बदलती।

“शहाबुद्दीन की तरह आज का दोषी कौन?”

उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह लालू शासन में अपराध के लिए शहाबुद्दीन को ज़िम्मेदार ठहराया गया, उसी तरह आज के अपराधों की जवाबदेही भी किसी को तय करनी चाहिए। और यदि जवाबदेही तय करनी है, तो वह सीधे तौर पर सरकार और उसके मंत्री पर आती है।

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