दो बार गलत तरीके से काटी गई करीब 56 हजार रुपये की राशि लौटाने का आदेश, ब्याज समेत मुआवजा और वाद खर्च भी देना होगा
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
विधि संवाददाता l सिवान।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मैरवा शाखा की कथित सेवा में गंभीर त्रुटि को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सिवान ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बैंक को सेवानिवृत्त शिक्षक रमाशंकर साहू के पक्ष में करीब 56 हजार रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने बैंक की सेवा को त्रुटिपूर्ण मानते हुए मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 10 हजार रुपये तथा वाद खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया है।

जानकारी के अनुसार नौतन थाना क्षेत्र के ग्राम किलपुर, पोस्ट कबीरपुर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रमाशंकर साहू ने आर्थिक कठिनाइयों के कारण एसबीआई मैरवा शाखा से आवासीय ऋण लिया था। बैंक की ओर से मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज उन्होंने समय पर उपलब्ध कराए और दो किस्तों में दो लाख रुपये की मूल राशि जमा कर दी। इसके बाद वे समय-समय पर ब्याज का भी भुगतान करते रहे। आवासीय ऋण खाते में मात्र 56,886 रुपये शेष रह गए थे।
इसी दौरान बच्चों की शिक्षा के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होने पर उन्होंने पुनः बैंक से ऋण का आवेदन किया। बैंक ने उन्हें 2.80 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण स्वीकृत किया, लेकिन इस राशि से पहले आवासीय ऋण की बकाया राशि 56,886 रुपये काट ली और ऋण खाता बंद कर उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी जारी कर दिया।

बाद में बैंक ने उनकी अच्छी साख को देखते हुए पांच लाख रुपये का एक और व्यक्तिगत ऋण स्वीकृत किया। आरोप है कि इस तीसरे ऋण से भी बैंक ने पुनः लगभग 56 हजार रुपये की कटौती कर दी और उक्त राशि किसी अन्य खाते में स्थानांतरित कर दी। वादी ने बैंक को पहले जारी एनओसी दिखाकर आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार परेशान होने के बाद रमाशंकर साहू ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद एवं सदस्य मनमोहन कुमार ने उपलब्ध अभिलेखों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का विस्तृत परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि बैंक की सेवा में गंभीर लापरवाही एवं त्रुटि हुई है।
आयोग ने आदेश दिया कि गलत तरीके से काटी गई लगभग 56 हजार रुपये की राशि वाद दायर करने की तिथि 11 फरवरी 2015 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर वादी को लौटाई जाए। साथ ही 10 हजार रुपये मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक क्षति के लिए तथा 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी भुगतान किया जाए।

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो मूल राशि पर ब्याज की दर 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत वार्षिक लागू होगी। वहीं 60 दिनों के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत आदेश के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है तथा बैंक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।







