सहरसा में कोशी का कहर: नवहट्टा प्रखंड के तीन दर्जन गांव डूबे, लोग बने जलकैदी

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सरकारी मदद नदारद, सड़कों पर उफनता पानी, कई गांवों का संपर्क टूटा

बिहार डेस्क। भागलपुर

केएमपी भारत न्यूज़। सहरसा। कोशी बराज से कल देर शाम साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किए जाने के बाद सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड के हालात बिगड़ गए हैं। सात पंचायतों के करीब तीन दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। गांव से लेकर मुख्य सड़कों तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। कई घरों में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया है, जिससे लोग घरों में ही जलकैदी बनकर रहने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उन्हें सरकारी राहत या सहायता नहीं मिली है। स्थिति ऐसी है कि लोग ऊंचे स्थानों या स्कूल भवनों में शरण लेने को विवश हैं। नवहट्टा प्रखंड के डुमरा चौक से गोरपार जाने वाली सड़क पर इस वक्त पानी ऊपर से बह रहा है। बहाव इतना तेज है कि किसी भी वक्त सड़क का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है।

आवागमन ठप होने का खतरा:
स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर पानी का बहाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले घंटों में कई गांवों का जिला मुख्यालय और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग हो जाएगा। नाव के सहारे भी आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

स्थानीयों की व्यथा:
ग्रामीण मोहम्मद मसले ने बताया, “हमलोग चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं, खाने-पीने की दिक्कत है। प्रशासन से कोई मदद नहीं पहुंची।”
वहीं सुरेश कुमार ने कहा, “मुख्य सड़क पर पानी बह रहा है, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बीमारों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है।”
कुंदन यादव बोले, “पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था, मगर सरकार ने कोई स्थायी इंतजाम नहीं किया।”

कोशी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर लोगों को तबाही की याद दिला दी है। नवहट्टा, गोरपार, डुमरा, सोनवर्षा, महुआ, नौहट्टा पश्चिमी और डगमारा पंचायतों के लोग राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से बाढ़ नियंत्रण और राहत कार्य शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

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