भोजपुरी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार में जुटे भावुक, युवाओं के विकास को बताया जरूरी
डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l पटना
संवाददाता, महाराजगंज (सीवान)।
भोजपुरी साहित्य और सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि और फिल्म गीतकार मनोज भावुक मंगलवार को महराजगंज प्रखंड के बंगरा गांव स्थित रघुवीर सिंह पुस्तकालय सह वाचनालय पहुंचे। यहां उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके बाद पुस्तकालय परिसर में आयोजित सादे लेकिन गरिमामय समारोह में शिक्षक कुमार राज कपूर उर्फ टीपू ने अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।
भोजपुरी श्रृंखला की 50 पुस्तकें दान में दीं
समारोह के दौरान मनोज भावुक ने पुस्तकालय को भोजपुरी साहित्य की श्रृंखला की 50 मूल्यवान पुस्तकें दान स्वरूप भेंट कीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय ज्ञान के दीपक होते हैं और युवाओं के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षक टीपू ने बताया कि मनोज भावुक पूरी दुनिया में भोजपुरी भाषा के विस्तार और उसके साहित्य के संरक्षण को लेकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। मॉरिशस, युगांडा, नीदरलैंड, लंदन, नेपाल और दुबई सहित कई देशों में बसे भोजपुरी समाज से जुड़कर वे वहां के पुस्तकालयों में भी भोजपुरी किताबें भेज रहे हैं, ताकि प्रवासी भोजपुरी भाषी भी अपनी मिट्टी की खुशबू से जुड़े रहें।
भोजपुरी साहित्य को कर रहे वैश्विक स्तर पर समृद्ध
मनोज भावुक भोजपुरी रचनाओं का विभिन्न देशों की भाषाओं में अनुवाद कराने के प्रयास में भी लगे हुए हैं। यह कदम भोजपुरी भाषा के वैश्विक उत्थान की दिशा में एक अनूठा प्रयोग माना जा रहा है।
गौरतलब है कि मनोज भावुक ने वर्ष 2007 में लंदन में अपनी स्थापित इंजीनियरिंग नौकरी छोड़कर जीवन को पूरी तरह भोजपुरी भाषा की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनके इस योगदान के लिए उन्हें भारतीय भाषा सम्मान, फिल्मफेयर, फेमिना सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
सिनेमा और साहित्य की कड़ी
भोजपुरी सिनेमा और साहित्य को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी माने जाने वाले मनोज भावुक ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘आपन कहाये वाला के बा’ के सभी गीत लिखे हैं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी कला-संस्कृति ऐसी होनी चाहिए जिसे सभी पीढ़ियां एक साथ बैठकर सुन और समझ सकें।
डिजिटलाइजेशन की पहल भी की
कार्यक्रम के दौरान मनोज भावुक ने पुस्तकालय को अपनी नई प्रकाशित पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ भेंट की। साथ ही अपनी चर्चित कृतियों ‘तस्वीर जिंदगी के’, ‘वो चलनी में पानी’ समेत 50 और पुस्तकें देने का आश्वासन भी दिया।
उन्होंने पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन का सुझाव दिया और इसे अपनी डिजिटल पत्रिका ‘भोजपुरी जंक्शन’ से जोड़ने की इच्छा जताई। इस पत्रिका के अब तक 60 से अधिक विशेषांक प्रकाशित हो चुके हैं, जो भोजपुरी साहित्य का महत्वपूर्ण डिजिटल अभिलेख बन चुके हैं।
कार्यक्रम में गांव के शिक्षक, युवाओं और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही। सभी ने मनोज भावुक के इस योगदान को भोजपुरी भाषा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण बताया।






