पीपीसी-2026 पंजीकरण में सिवान की उपलब्धि सिर्फ 2.15%
लक्ष्य से काफी पीछे; डीईओ ने सभी बीईओ और विद्यालय प्रधानों को रजिस्ट्रेशन तेज करने का निर्देश दिया
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत, पटना:
सिवान।
परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी) 2026 के तहत बिहार में जिलावार पंजीकरण की स्थिति सामने आ चुकी है। 27 दिसंबर 2025 को सुबह 10:30 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार सिवान जिला राज्य की रैंकिंग में 35वें स्थान पर है। जिले की कुल उपलब्धि मात्र 2.15 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो बेहद ही चिंताजनक मानी जा रही है। शिक्षा विभाग के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में यह प्रगति अत्यंत असंतोषजनक बताई जा रही है।

पीपीसी-2026 के अंतर्गत सिवान जिले के लिए कुल लक्ष्य 1,71,236 पंजीकरण का निर्धारित है। इसके मुकाबले अब तक केवल 3,685 लोगों का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है। इनमें 2,742 छात्र, 904 शिक्षक और मात्र 39 अभिभावक शामिल हैं। प्रतिशत के लिहाज से यह आंकड़ा राज्य के कई जिलों से काफी पीछे है। वहीं, शेखपुरा जिला 31.22 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि खगड़िया, वैशाली और मुंगेर जैसे जिले भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कक्षा 6 से 12 तक अध्ययनरत कुल नामांकित छात्रों में से कम से कम 40 प्रतिशत छात्रों का पंजीकरण अनिवार्य है। इसके साथ ही शत-प्रतिशत शिक्षकों और अपेक्षित संख्या में अभिभावकों का रजिस्ट्रेशन भी सुनिश्चित किया जाना है। विभाग द्वारा समय-समय पर आवश्यक पत्र, वीडियो और ऑनलाइन लिंक सभी प्रखंडों एवं विद्यालयों को उपलब्ध कराए गए हैं, इसके बावजूद सिवान जिले की प्रगति लक्ष्य से काफी पीछे है।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) राघवेंद्र प्रताप सिंह ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) और विद्यालय प्रधानों को सख्त निर्देश जारी किया है। डीईओ ने स्पष्ट कहा है कि निर्धारित संख्या में पीपीसी-2026 के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विद्यालय स्तर पर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को जागरूक करने, ऑनलाइन प्रक्रिया में सहयोग करने और प्रतिदिन की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करने, मार्गदर्शन देने और संवाद के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में इसमें कम भागीदारी जिले की शैक्षणिक छवि के लिए भी नकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
डीईओ राघवेंद्र प्रताप सिंह ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आने वाले दिनों में प्रगति में सुधार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार पदाधिकारियों और विद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अब देखना यह है कि सिवान जिला शिक्षा प्रशासन इस चुनौती को कितनी गंभीरता से लेकर रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बढ़ा पाता है।






