True Friendship: बिछड़ गई दो अधिवक्ता मित्रों की अभिन्न जोड़ी… 50 साल की दोस्ती का टूटा सहारा

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सिवान के जानेमाने अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय और अधिवक्ता बृजमोहन रस्तोगी की अभिन्न मित्रता रही मिसाल

सिवान के वरीय अधिवक्ता सुभाषकर जी के निधन से शोक में डूबा अधिवक्ता समाज व सोशल इंस्टीट्यूट क्लब

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

कृष्ण मुरारी पांडेय। सीवान।
शहर के अधिवक्ता समाज ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है, जिनकी पहचान सिर्फ एक सफल अधिवक्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, अभिभावक और मित्र के रूप में थी।

अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय के निधन से उनके अभिन्न मित्र अधिवक्ता बृजमोहन रस्तोगी के साथ-साथ पूरे अधिवक्ता समाज और सोशल इंस्टीट्यूट ऑफिसर्स क्लब में गहरा शोक व्याप्त है। लोगों की जुबान पर बस एक ही बात है—जोड़ी बिछड़ गई

फोटो कैप्शन : समाजसेवी ठाकुर राम इकबाल सिंह

क्लब के सचिव समाजसेवी ठाकुर राम इकबाल सिंह बताते हैं कि अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय और अधिवक्ता बृजमोहन रस्तोगी की अभिन्न दोस्ती करीब 50 वर्ष पुरानी थी। यह दोस्ती सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और आत्मीयता की मिसाल थी। क्लब से जुड़े सदस्यों और अधिवक्ताओं का कहना है कि इतने लंबे समय के रिश्ते में कभी दोनों के बीच तू-तू, मैं-मैं तक नहीं हुई। यह दोस्ती आज के समय में एक आदर्श उदाहरण मानी जाती है।

सुभाषकर पांडे जी सोशल इंस्टीट्यूट ऑफिसर्स क्लब के वाइस प्रेसिडेंट थे, जिसके अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी होते हैं। क्लब के सचिव समाजसेवी ठाकुर राम इकबाल सिंह कहते हैं कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से बतौर सचिव क्लब की सेवा दे रहे हैं। सुभाषकर पांडेय जी शुरू से ही क्लब की गतिविधियों से जुड़े रहे। वे पहले से ही क्लब के एग्जीक्यूटिव मेंबर थे और नियमित रूप से क्लब आते थे।

ठाकुर राम इकबाल सिंह बताते हैं कि सुभाषकर पांडेय जी खेलों के प्रति विशेष रुचि रखते थे। वे क्लब के सदस्यों के लिए एक अभिभावक की तरह थे। किसी भी सदस्य को सलाह या मार्गदर्शन की जरूरत होती, तो वे हमेशा उपलब्ध रहते थे। उनके नहीं रहने से क्लब के सदस्यों को गहरा आघात पहुंचा है और यह खालीपन लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

क्लब के कैशियर सुबेश सिन्हा (बैडमिंटन क्लब के जिला सचिव), वरीय अधिवक्ता अमरेंद्र सिंह, श्याम सोमानी और पप्पू अग्रवाल ने भी उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि सुभाषकर पांडेय जी अत्यंत मृदुभाषी थे। उनके शब्दों में हमेशा अपनापन और सादगी झलकती थी। वे कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करते थे, लेकिन उनकी बातों में गहराई और अनुभव होता था।

अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय जी और बृजमोहन रस्तोगी की दोस्ती की खास बात यह थी कि वे लगभग हर दिन मिलते थे। छुट्टी के दिनों में तो सुबह और शाम दोनों समय मुलाकात निश्चित होती थी। रोज शाम को रस्तोगी जी सुभाषकर पांडे जी के आवास पर जाते थे, जहां अन्य अधिवक्ता भी जुटते थे।

आपसी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद रात करीब 8 बजे बैठक समाप्त होती थी, और सुभाषकर पांडे जी स्वयं सभी को घर से निकालकर मेन रोड तक छोड़ने जाते थे।

फोटो कैप्शन : सिवान के दिवंगत वरीय अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय जी

आज वही घर, वही रास्ता और वही शामें अधूरी लग रही हैं। अधिवक्ता समाज, क्लब के सदस्य और शहर के लोग एकमत से कहते हैं कि सुभाषकर पांडेय जी जैसे व्यक्तित्व विरले होते हैं। उनके जाने से जो शून्य बना है, उसकी भरपाई आसान नहीं है।

फोटो कैप्शन: अधिवक्ता सुभाषकर पांडेय जी के अभिन्न मित्र अधिवक्ता बृजमोहन रस्तोगी

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