प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि धूमिल करने के आरोप में भाजयुमो का विरोध, कई वरिष्ठ भाजपा नेता रहे मौजूद
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
संवाददाता। सिवान
सिवान शहर का जेपी चौक शनिवार को उस समय राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेतृत्व में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय एआई सम्मेलन के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के विरोध में आयोजित किया गया।
भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वैश्विक स्तर के इस महत्वपूर्ण मंच पर राजनीतिक विरोध के नाम पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि निंदनीय भी है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि आज भारत तकनीक, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में विश्व स्तर पर तेजी से उभर रहा है। ऐसे समय में देश की प्रतिष्ठा से जुड़े मंचों पर विरोध प्रदर्शन करना राष्ट्रहित के विपरीत है।
नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर एक नई पहचान बनाई है। इस पहचान को कमजोर करने का कोई भी प्रयास देशहित के खिलाफ माना जाएगा। युवा मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में भी राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर मुखरता से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राहुल तिवारी, जिला महामंत्री राजेश श्रीवास्तव, मुकेश सिंह कुशवाहा, कुंदन सिंह, सुभाष सिंह, अनुरंजन मिश्रा, सत्यम सिंह सोनू एवं अमित सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वहीं युवा मोर्चा की ओर से जिला महामंत्री विनय सोनी, मृत्युंजय राज, जिला उपाध्यक्ष महेश गुप्ता, गोविंद बसु, चंचल सिंह, रवि पटेल, जिला मंत्री आशुतोष चौबे, शुभम सिंह, प्रिंस चौहान, नवीन जैन, नगर महामंत्री राहुल कुमार, नगर मंत्री विकास कुमार, विकास कुमार शाह, विवेक कुमार, नगर उपाध्यक्ष दीपक कुमार दीपू, श्याम कुमार एवं अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रविरोधी मानसिकता के खिलाफ यह विरोध जारी रहेगा और देश की प्रतिष्ठा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।






