दो मासूम बच्चों को पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत अधिकतम सहायता देने का निर्देश
विधि संवाददाता l सीवान।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवम सुशांत रंजन की अदालत ने गुरुवार को दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी धर्मेंद्र यादव को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही मृतका के दो नाबालिग बच्चों को बिहार पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत अधिकतम सुविधाएं एवं निर्धारित राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। निर्णय की प्रति संबंधित अधिकारी को भेजने का भी आदेश दिया गया है।

मामला महाराजगंज थाना क्षेत्र के चंदौली गांव का है। अभियोजन के अनुसार, छपरा जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र के यादव टोला निवासी राजनाथ यादव ने अपनी पुत्री इंदू देवी की शादी महाराजगंज के चंदौली गांव निवासी धर्मेंद्र यादव के साथ की थी। शादी के बाद से ही इंदू को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल पक्ष की ओर से मायके से एक लाख रुपये नकद और सोने की चेन लाने का दबाव बनाया जाता था।

विवाह के बाद इंदू देवी को एक पुत्र और एक पुत्री हुए। दोनों बच्चे महज करीब एक और दो वर्ष की उम्र के थे। इसके बावजूद दहेज की मांग और प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका। अभियोजन का आरोप है कि अंततः ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को जला दिया।
एक दिन पहले ही कर दी गई थी हत्या
28 मार्च 2024 की सुबह सूचना मिलने पर मृतका के पिता राजनाथ यादव अपनी बेटी के ससुराल चंदौली पहुंचे। वहां उन्हें जानकारी मिली कि उनकी बेटी की एक दिन पूर्व ही हत्या कर दी गई थी और शव को जला दिया गया था। इसके बाद राजनाथ यादव की सूचना पर महाराजगंज थाने में धर्मेंद्र यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।


मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक याहिया खान ने अदालत के समक्ष साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कृष्णादित्य तिवारी ने बहस की। दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने धर्मेंद्र यादव को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत के इस फैसले से मृतका के परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं दो छोटे बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।





