राष्ट्रीय महासचिव का दावा—संघ के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर 3545 के कथित दुरुपयोग से लोगों को किया जा रहा भ्रमित
रूपेश कुमार का पलटवार—‘यशपाल चौहान और राकेश कुमार खुद डुप्लीकेट’
संघ के राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार (रवि वर्मा) ने बिहार के सोनार समाज को कथित फर्जी समूह से सावधान रहने की अपील
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
कृष्ण मुरारी पांडेय l सिवान।
अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ (रजि. 3545) के नाम और पदाधिकारियों को लेकर सिवान में विवाद शुरू हो गया है। एक ओर सीवान के स्वर्ण व्यवसाई रूपेश कुमार की ओर से जहां खुद को अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ (रजि. 3545) का राष्ट्रीय सचिव बताए जाने की बात सामने आई है, वहीं संघ के राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार (रवि वर्मा) ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि रूपेश कुमार संगठन में किसी भी पद पर नहीं हैं और उनके द्वारा संघ तथा उसके रजिस्ट्रेशन नंबर 3545 का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब रूपेश कुमार ने पलटवार करते हुए राकेश कुमार (रवि वर्मा) और संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल चौहान की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए। रूपेश कुमार का कहना है कि तथाकथित राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल चौहान और राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार (रवि वर्मा) स्वयं डुप्लीकेट हैं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बाद अब विवाद केवल किसी एक पद को लेकर नहीं रह गया है, बल्कि संगठन की वैधता, पंजीयन संख्या, पदाधिकारियों और अधिकारिक प्रतिनिधित्व तक पहुंच गया है।

एक ही संगठन, लेकिन पदाधिकारियों को लेकर अलग-अलग दावे
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ (रजि. 3545) की ओर से 17 सितंबर 2026 को जारी पत्र में बिहार के सोनार समाज को कथित फर्जी समूह से सावधान रहने की अपील की गई है। पत्र पर राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार (रवि वर्मा) के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में कहा गया है कि कुछ लोग “अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ 3545” के नाम का इस्तेमाल कर बिहार में सोनार समाज के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। इसी क्रम में पत्र में रूपेश कुमार सहित कथित रूप से संबंधित लोगों की गतिविधियों पर सवाल उठाए गए हैं।
अब सिवान में रूपेश कुमार द्वारा खुद को राष्ट्रीय सचिव बताए जाने के बाद विवाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

राकेश कुमार बोले—संघ में रूपेश कुमार का कोई पद नहीं
अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव राकेश कुमार (रवि वर्मा) के अनुसार, रूपेश कुमार संघ के किसी भी पद पर नियुक्त नहीं हैं। उनका आरोप है कि रूपेश कुमार द्वारा संगठन के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर 3545 का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राकेश कुमार का कहना है कि संगठन का नाम और पंजीयन संख्या किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत दावे से नहीं जुड़ सकती। यदि कोई व्यक्ति संगठन का पदाधिकारी होने का दावा करता है तो उसके पास नियुक्ति, चुनाव अथवा संगठन के अधिकृत रिकॉर्ड से संबंधित प्रमाण होना चाहिए।
उनकी ओर से जारी पत्र में भी संगठन के नाम से कथित तौर पर फर्जी चुनाव, पैन कार्ड और बैंक खाते आदि के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित न्यायालयी आदेश और आधिकारिक अभिलेखों का सत्यापन जरूरी होगा।

रूपेश कुमार का पलटवार—‘ये लोग खुद डुप्लीकेट’

दूसरी ओर, रूपेश कुमार ने राकेश कुमार (रवि वर्मा) के आरोपों को स्वीकार करने के बजाय उन्हीं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रूपेश कुमार का कहना है कि यशपाल चौहान, जिन्हें राकेश कुमार (रवि वर्मा) राष्ट्रीय अध्यक्ष बता रहे हैं, और खुद राकेश कुमार (रवि वर्मा) ही तथाकथित डुप्लीकेट हैं। उनका दावा है कि वास्तविक संगठन और उसके पदाधिकारियों को लेकर स्थिति अलग है।
यानी विवाद में दोनों पक्ष एक-दूसरे के दावे को चुनौती दे रहे हैं। एक पक्ष जहां रूपेश कुमार के पदाधिकारी होने को नकार रहा है, वहीं दूसरा पक्ष वर्तमान बताए जा रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव की वैधता पर ही प्रश्न उठा रहा है।
विवाद का असली सवाल—3545 नंबर का अधिकृत इस्तेमाल किसके पास?
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल संगठन के रजिस्ट्रेशन नंबर 3545 को लेकर है। दोनों पक्ष यदि इसी संगठन का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं तो यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित पंजीयन किस संस्था के नाम पर है, वर्तमान में उसके अधिकृत पदाधिकारी कौन हैं और संगठन के नियमों के अनुसार पदाधिकारियों के चुनाव अथवा नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है।
किसी संगठन के पदाधिकारी होने का दावा केवल लेटरहेड, विजिटिंग कार्ड या सोशल मीडिया पोस्ट से साबित नहीं होता। इसके लिए संबंधित पंजीयन प्रमाणपत्र, नियमावली, अधिकृत पदाधिकारियों की सूची, चुनाव की कार्यवाही और आवश्यक होने पर संबंधित विभाग के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
चुनाव को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल
राष्ट्रीय महासचिव की ओर से जारी पत्र में संगठन के नाम पर कथित चुनाव को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। पत्र में पूछा गया है कि चुनाव की घोषणा कब और किस माध्यम से हुई? उम्मीदवारों ने नामांकन कब दाखिल किया? चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षक कौन थे? कुल मतदाता कितने थे और मतदान का परिणाम क्या रहा?
पत्र में इन सवालों के आधार पर संबंधित चुनाव को कथित रूप से फर्जी बताया गया है।
दूसरी तरफ, यदि रूपेश कुमार स्वयं को राष्ट्रीय सचिव बताते हैं और वर्तमान पदाधिकारियों की वैधता को चुनौती देते हैं, तो उनके दावे का आधार भी संगठन के आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होना अपेक्षित है।
सोनार समाज के सामने अब कई सवाल
इस विवाद के कारण बिहार के सोनार समाज के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ (रजि. 3545) का वास्तविक अधिकृत नेतृत्व किसके पास है? राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव के पद पर कौन वैध रूप से अधिकृत है? रूपेश कुमार को राष्ट्रीय सचिव के रूप में किस प्रक्रिया के तहत नियुक्त या निर्वाचित किया गया? संगठन के चुनाव की आधिकारिक कार्यवाही क्या है? और रजिस्ट्रेशन नंबर 3545 का वर्तमान में वैधानिक रूप से इस्तेमाल कौन कर सकता है?
इन सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि मूल पंजीयन दस्तावेज, संगठन की नियमावली, चुनाव रिकॉर्ड और संबंधित सरकारी अथवा न्यायालयी अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकता है।
आरोपों के बीच अब प्रमाणों पर टिकी निगाह
फिलहाल सिवान में सामने आए इस विवाद में दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। राकेश कुमार (रवि वर्मा) रूपेश कुमार को संगठन का पदाधिकारी मानने से इनकार कर रहे हैं और संगठन के नाम व रजिस्ट्रेशन नंबर के कथित दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। वहीं रूपेश कुमार इन आरोपों को खारिज करते हुए यशपाल चौहान और राकेश कुमार (रवि वर्मा) की ही वैधता पर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में इस विवाद का निष्पक्ष समाधान तभी संभव है, जब दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में मूल दस्तावेज सार्वजनिक करें और संबंधित पंजीयन प्राधिकारी अथवा सक्षम न्यायालय के रिकॉर्ड से स्थिति स्पष्ट हो।
फिलहाल, इतना तो स्पष्ट है कि अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ (रजि. 3545) के नाम पर सिवान से शुरू हुआ यह विवाद अब संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व और उसकी वैधता तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि दोनों पक्षों के दावों में तथ्यात्मक स्थिति क्या है।






