चोरी हुई मोटरसाइकिल के बीमा दावे पर आयोग ने कंपनी को 97,678 रुपए देने का दिया था आदेश, इजराय की कार्रवाई से पहले ही जमा कराया चेक; दो अन्य मामलों में 75,750 रुपए में हुआ समझौता
कोर्ट न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
विधि संवाददाता l सीवान
मोटरसाइकिल चोरी के मामलों में बीमा कंपनियों की ओर से दावों के निपटारे में बरती गई लापरवाही पर सीवान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के आदेश के बाद एक मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने ब्याज, क्षतिपूर्ति और वाद खर्च समेत 97,678 रुपए का भुगतान किया, जबकि दो अन्य मामलों में टाटा एआईजी और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनियों ने क्रमश: 30,000 रुपए और 45,750 रुपए में समझौता कर मामलों का निपटारा किया। आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद और सदस्य मनमोहन कुमार की मौजूदगी में संबंधित शिकायतकर्ताओं को राशि के चेक सौंपे गए।
समय पर पुलिस को सूचना देने के बावजूद बीमा दावा हुआ था खारिज
मखदूम सराय, सीवान निवासी दीपक सोनी ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, छपरा के शाखा प्रबंधक के खिलाफ त्रुटिपूर्ण सेवा का आरोप लगाते हुए आयोग में वाद दायर किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, 26 दिसंबर 2018 की रात करीब 9 बजे उनकी अपाची मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। घटना की सूचना उन्होंने तत्काल सीवान नगर थाना को दी। चोरी के समय वाहन बीमा अवधि में था और उन्होंने बीमा कंपनी को आवश्यक सभी दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए थे।
बीमा कंपनी ने घटना की जांच कराई, लेकिन दावा भुगतान के लिए शिकायतकर्ता को कई बार छपरा जाना पड़ा। इसके बावजूद दावा लंबित रहा। बाद में प्राथमिक दर्ज होने में विलंब को आधार बनाकर बीमा कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया। इसके बाद दीपक सोनी ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
आयोग ने कहा- पुलिस की देरी के लिए उपभोक्ता जिम्मेदार नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने मोटरसाइकिल चोरी की सूचना पुलिस को समय पर दी थी, जबकि प्राथमिकी पुलिस की ओर से विलंब से दर्ज की गई। आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद बीमा कंपनी को मोटरसाइकिल के बीमा मूल्य 67,955 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया।

आदेश के अनुसार, वाद दायर करने की तिथि 30 सितंबर 2022 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि का भुगतान आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर किया जाना था। इसके अतिरिक्त आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपए तथा वाद खर्च के रूप में 5,000 रुपए देने का निर्देश दिया गया।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत ब्याज लागू होगा। 60 दिनों के बाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत इजराय की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इजराय से पहले ही कंपनी ने जमा कराया चेक
आयोग के आदेश के बाद बीमा कंपनी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 97,678 रुपए का चेक शिकायतकर्ता के इजराय वाद दाखिल करने से पहले ही आयोग के समक्ष जमा करा दिया। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य ने शिकायतकर्ता को उसके अधिवक्ता की पहचान के आधार पर चेक सौंपा। भुगतान से संतुष्ट होने के बाद दीपक सोनी का वाद समाप्त कर दिया गया।
दो अन्य मामलों में भी बीमा कंपनियों ने किया समझौता
उपभोक्ता आयोग के सख्त रुख के बीच दो अन्य मामलों में भी बीमा कंपनियों ने समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा किया।
मैरवा थाना क्षेत्र के बड़गांव निवासी जयप्रकाश यादव ने गणेश ट्रेडर्स और टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ वाद दायर किया था। उन्होंने गणेश ट्रेडर्स से हीरो पैशन मोटरसाइकिल खरीदी थी, जिसका बीमा टाटा एआईजी से था। 11 जुलाई 2023 को सीवान कचहरी से मोटरसाइकिल चोरी हो गई। नगर थाना में सूचना देने के बाद पुलिस जांच में मामले को सत्य एवं सूत्रहीन पाया गया। बीमा कंपनी को भी घटना की सूचना दी गई थी।
मामले में आयोग के रुख को देखते हुए टाटा एआईजी ने 30,000 रुपए में समझौता किया। आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद एवं सदस्य मनमोहन कुमार ने स्वयं शिकायतकर्ता को चेक सौंपा और उसकी सहमति के बाद वाद समाप्त कर दिया।
इसी तरह गोरियाकोठी थाना क्षेत्र के लधी बाजार निवासी सिराजुल हक के मामले में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड कंपनी ने 45,750 रुपए में समझौता किया। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य ने शिकायतकर्ता को समझौता राशि का चेक सौंपा। राशि प्राप्त करने पर सिराजुल हक की सहमति से वाद समाप्त कर दिया गया।






