नालंदा में निगरानी की बड़ी कार्रवाई: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया हल्का कर्मचारी, हाथ धोते ही हो गया ‘लाल’

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– करायपरसुराय अंचल कार्यालय में चल रही थी घूसखोरी की ‘डील’
– म्यूटेशन फाइल पास करने के नाम पर वसूले जा रहे थे 5 हजार रुपये

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

बिहारशरीफ। अविनाश पांडेय
पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने गुरुवार को नालंदा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करायपरसुराय अंचल कार्यालय के हल्का कर्मचारी संजय कुमार को 4,500 रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने उसे डियावां गांव के पास पुल पर तब पकड़ा, जब वह शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम ले रहा था। जैसे ही उसने नोट हाथ में लिए, निगरानी टीम ने उसे वहीं धर दबोचा। गिरफ्तारी के साथ ही पूरा इलाका हड़कंप में आ गया।


म्यूटेशन फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर मांगे थे 5 हजार रुपये

मामला जमीन के म्यूटेशन से जुड़ा था। पीड़ित के मुताबिक हल्का कर्मचारी संजय कुमार कई दिनों से फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 5,000 रुपये की मांग कर रहा था। पैसे देने में हो रही असमर्थता और लगातार दबाव के कारण पीड़ित ने आखिरकार पटना स्थित निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तुरंत एक टीम गठित की और पूरे प्रकरण की छानबीन शुरू कर दी।

टीम ने पहले शिकायत की सत्यता की जांच की और फिर ट्रैप की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत पीड़ित को 4,500 रुपये देने को कहा गया, ताकि आरोपी की हरकत कैमरे और साक्ष्यों में कैद हो सके। योजना के मुताबिक जैसे ही आरोपी ने रकम स्वीकार की, टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।


गिरफ्तारी के बाद पटना ले जाकर शुरू हुई पूछताछ

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने संजय कुमार को हिरासत में लेकर पटना भेज दिया। वहां उससे पूछताछ की जा रही है कि क्या वह अकेले घूसखोरी कर रहा था या इस मामले में अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि कहीं यह कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं है, जो म्यूटेशन समेत अन्य कार्यों में अवैध वसूली करता रहा हो।


लोगों ने कहा— ‘पहले भी मिलती थी शिकायतें’

स्थानीय लोगों का कहना है कि म्यूटेशन और अंचल से जुड़े कई कार्यों में घूसखोरी की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं, लेकिन कार्रवाई न होने से लोग मजबूरन रिश्वत देने को विवश थे। निगरानी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की उम्मीद जगा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी नियमित कार्रवाई होने लगे, तो कार्यालयों में फैली अवैध वसूली की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।


भ्रष्टाचार पर निगरानी का सख्त रुख

निगरानी ब्यूरो पिछले कुछ महीनों से लगातार ट्रैप ऑपरेशन चला रहा है। विभाग का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में बढ़ती रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नालंदा में हुई यह गिरफ्तारी विभाग की एक और सफल कार्रवाई मानी जा रही है, जिसने स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के खेल को फिर उजागर कर दिया है।

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