Sekhpura: एक आवेदन, दस साल की सजा: शेखपुरा में फर्जी अतिक्रमण केस ने उजागर की सिस्टम की लापरवाही

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सरकारी तालाब पर कब्जे का झूठा आरोप, पीड़ित व्यक्ति 10 वर्षों से भुगत रहा प्रशासनिक उत्पीड़न

चंदन कुमार। शेखपुरा (बिहार)।
बिहार के शेखपुरा जिले से प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मेंहुस थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव निवासी कुंदन कुमार बीते करीब दस वर्षों से एक फर्जी अतिक्रमण मामले में उलझे हुए हैं। एक कथित आवेदन के आधार पर उन्हें न सिर्फ प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े, बल्कि न्याय की तलाश में हाईकोर्ट तक जाना पड़ा।

मामला वर्ष 2016 का है, जब गांव के कुछ लोगों ने राजनीतिक द्वेष के चलते तत्कालीन अंचलाधिकारी को आवेदन देकर आरोप लगाया कि कुंदन कुमार ने सरकारी तालाब पर अतिक्रमण कर लिया है। पीड़ित का कहना है कि जिस तालाब की बात की जा रही है, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद उनके खिलाफ अतिक्रमण वाद दर्ज कर लिया गया, जो आज तक चलता आ रहा है।

कुंदन कुमार ने अंचल कार्यालय, जिला प्रशासन और वरीय अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए, तो अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके खेत के पास लगे पेड़-पौधों को कटवा दिया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।

इस मामले में पीड़ित ने वन विभाग से भी शिकायत की, लेकिन यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि संबंधित भूमि उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। लगातार मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न से परेशान होकर वर्ष 2023 में कुंदन कुमार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला पदाधिकारी से छह सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।

एक कथित फर्जी आवेदन के आधार पर एक व्यक्ति को करीब एक दशक तक परेशान किया जाना प्रशासनिक संवेदनहीनता और सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। अब पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है।

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