Holi Celebration: रंग, उमंग और संस्कृति का संगम: होली मिलन समारोह में झूम उठा बिहार पब्लिक स्कूल परिसर

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, फूलों और गुलाल के साथ मनाया गया रंगोत्सव


एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता। सिवान

बिहार पब्लिक स्कूल, सिवान में रविवार को होली मिलन समारोह का आयोजन पूरे उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया। रंगों के इस त्योहार को विद्यालय परिवार ने सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल्यों के साथ जोड़ते हुए एक यादगार उत्सव में बदल दिया, जिसमें छात्र–छात्राओं की भागीदारी देखने लायक रही। https://youtu.be/00ip9PzQtFQ?si=AhtRLAJ54ziAI2WR

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के संगीत शिक्षा दीपक कुमार सिंहा द्वारा भगवान शिव को समर्पित लोकधुन “खेले मसान में होली” की मधुर प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। इसके बाद छात्राओं ने रंग-बिरंगे परिधानों में पारंपरिक एवं आधुनिक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। लोकगीतों, समूह नृत्य और होली थीम पर आधारित प्रस्तुतियों ने समारोह में चार चांद लगा दिए।

विद्यालय परिसर रंगों, फूलों और सजावट से सुसज्जित था। हर ओर उल्लास और उत्साह का माहौल था। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी, वहीं शिक्षकों ने भी इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ना और आपसी प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे की भावना को मजबूत करना था। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का पर्व है।

प्रधानाचार्य विनोद प्रसाद सिंहा ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति को भी समान महत्व देता है। उन्होंने कहा,
“हमारा उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बनाना है। ऐसे आयोजनों से बच्चों में रचनात्मकता, टीम भावना और सामाजिक जुड़ाव विकसित होता है।”

समारोह के अंत में छात्रों और शिक्षकों ने एक-दूसरे को फूलों और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। रंगों के साथ हंसी, गीत और उत्साह ने पूरे विद्यालय परिसर को त्योहारमय बना दिया।

यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भारतीय परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत पाठ भी साबित हुआ।

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