Siwan News: भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की लड़ाई तेज करने का आह्वान

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भोजपुरी शिरोमणि अक्षयवर दीक्षित की जयंती पर साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने याद किया योगदान, आंदोलन को फिर धार देने की बनी रणनीति

भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की उठी मांग

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सीवान। भोजपुरी विकास मंडल सीवान के तत्वावधान में गुरुवार को निराला नगर स्थित भोजपुरी भवन में भोजपुरी शिरोमणि, साहित्यकार और शिक्षक स्वर्गीय अक्षयवर दीक्षित की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी विकास मंडल के अध्यक्ष युगल किशोर दूबे ने की। आयोजन की शुरुआत दीक्षित जी के तैल चित्र पर उनके सुपुत्र अखिलेश्वर दीक्षित द्वारा माल्यार्पण से हुई। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और कलाकारों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया।

कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा और साहित्य के विकास में अक्षयवर दीक्षित के योगदान को विस्तार से याद किया गया। भोजपुरी विकास मंडल के सचिव मार्कण्डेय ने उनके संघर्षमय जीवन और साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग आज भी अधूरी है। उन्होंने कहा कि यह मंच वर्षों से इस लड़ाई को लड़ता आ रहा है और अब इसे और व्यापक रूप देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कई लोग भोजपुरी के नाम पर ऊंचे पदों तक पहुंचे, लेकिन भाषा को उचित सम्मान दिलाने की लड़ाई को बीच में छोड़ दिया। ऐसे में अब सभी भोजपुरी प्रेमियों, साहित्यकारों और जनप्रतिनिधियों को फिर से एकजुट होकर इस आंदोलन को मजबूती देनी होगी।

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इस अवसर पर प्रो. उपेन्द्र नाथ यादव, अरुण कुमार सिंह, रंगकर्मी डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव और भोगेंद्र झा ने भी अपने विचार रखे और अक्षयवर दीक्षित के साहित्यिक अवदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी जनमानस की भाषा है और इसे संवैधानिक मान्यता दिलाना समय की मांग है। कार्यक्रम का समापन भोजपुरी भाषा के सम्मान और अधिकार की लड़ाई को जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।

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