Siwan: चरक जयंती पर गूंजा आयुर्वेद के गहन अध्ययन का संदेश, छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

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चरक संहिता को केवल चिकित्सा ग्रंथ नहीं, जीवन और दर्शन का भी शास्त्र बताया

दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में श्लोक, पोस्टर और रंगोली प्रतियोगिता आयोजित

एजुकेशन न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता l सीवान |

नागपंचमी के अवसर पर सोमवार को दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सीवान में विश्व आयुर्वेद परिषद के बैनर तले चरक जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के विद्यार्थियों को महर्षि चरक की शिक्षाओं और चरक संहिता के नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया। समारोह में शिक्षकों और वक्ताओं ने आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को समझने के लिए विद्यार्थियों से गंभीरता से अध्ययन करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय परिसर में स्थित महर्षि चरक की प्रतिमा के विधिवत पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद धनवंतरी सभागार में आयोजित मुख्य समारोह में महर्षि चरक के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुधांशु शेखर त्रिपाठी, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रांत संरक्षक एवं महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रजापति त्रिपाठी, मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के पूर्व आचार्य डॉ. पृथ्वीनाथ पांडेय, उपप्राचार्य डॉ. राजा प्रसाद, डॉ. उपेंद्र कुमार पर्वत और डॉ. आर.आर. शर्मा सहित शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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चरक संहिता में हर अध्ययन पर कुछ नया मिलता है

समारोह में वैद्य पृथ्वीनाथ पांडेय को विश्व आयुर्वेद परिषद की परंपरा के अनुसार गुरुजन सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चरक संहिता केवल चिकित्सा शास्त्र नहीं, बल्कि दर्शन, आहार और जीवन विज्ञान का भी महत्वपूर्ण ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि इसके अध्ययन से व्यक्ति के समग्र विकास की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है। विद्यार्थियों को चरक संहिता का पूर्ण मनोयोग से अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि इसके अध्ययन में बार-बार नए विषय और नई समझ सामने आती है।

रोज चरक संहिता का एक पन्ना पढ़ने की अपील

महाविद्यालय के द्रव्यगुण विभागाध्यक्ष वैद्य आर.आर. शर्मा ने आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत के काल से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आयुर्वेद की ज्ञान परंपरा को समझने और अपने अध्ययन के माध्यम से इसकी विशेषताओं को सामने लाने का आह्वान किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि छात्र प्रतिदिन चरक संहिता का कम से कम एक पन्ना पढ़ने का अभ्यास करें तो आयुर्वेद के मूल ज्ञान को समझने में उन्हें काफी मदद मिलेगी।

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रांत संरक्षक, महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं शासी निकाय के सलाहकार वैद्य प्रजापति त्रिपाठी ने नागपंचमी और चरक जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को आयोजित प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्साहवर्धन किया।

चरक जयंती के अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें श्लोक वाचन, पोस्टर और रंगोली प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय प्रशासन की ओर से पुरस्कृत किया गया।

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