जमा राशि का भुगतान नहीं करने पर सेवा में त्रुटि माना, 1.70 लाख रुपए पर ब्याज के साथ 15 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश
कोर्ट न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
विधि संवाददाता | सीवान
जमा राशि की परिपक्वता के बाद भी भुगतान नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सीवान ने जीरादेई पैक्स के खिलाफ फैसला सुनाया है। आयोग ने पैक्स की सेवा में त्रुटि मानते हुए वादिनी को परिपक्व राशि, उस पर निर्धारित ब्याज तथा आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही वाद खर्च के रूप में भी राशि भुगतान करने को कहा गया है।
जानकारी के अनुसार जीरादेई प्रखंड के जामापुर गांव निवासी सुफिया आफरीन ने 4 फरवरी 2015 को जीरादेई पैक्स में 1,10,920 रुपए जमा किए थे। पैक्स अध्यक्ष की ओर से उन्हें बताया गया था कि दो वर्ष बाद यह राशि ब्याज सहित 1,36,400 रुपए हो जाएगी। इसके अलावा वादिनी ने पैक्स में दो डेली खाते भी खुलवाए थे, जिनमें कुल 94,400 रुपए जमा थे। दोनों खाते भी निर्धारित समय पर परिपक्व हो चुके थे।
कई बार मांगने के बाद भी नहीं हुआ भुगतान
वादिनी के अनुसार परिपक्वता राशि के भुगतान के लिए उन्होंने पैक्स अध्यक्ष से कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पैक्स अध्यक्ष को दो बार विधिक नोटिस भेजा। समाचार पत्र के माध्यम से भी नोटिस का प्रकाशन कराया गया। इसके बावजूद विपक्षी पैक्स अध्यक्ष उपभोक्ता आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।

आयोग ने नोटिस के प्रकाशन के बावजूद विपक्षी के उपस्थित नहीं होने पर 15 दिसंबर 2023 को तामिला संपुष्टि मानते हुए मामले की एकपक्षीय सुनवाई शुरू की। वादिनी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और अभिलेखों की आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद तथा सदस्य मनमोहन कुमार ने विवेचना की। सुनवाई के बाद आयोग ने विपक्षी की सेवा में त्रुटि पाई।
1.69 लाख की राशि पर ब्याज देने का आदेश
आयोग ने आदेश दिया कि 1,36,400 रुपए की परिपक्व राशि तथा प्रमाणित दूसरी राशि 33,578 रुपए, यानी कुल 1,69,978 रुपए पर वाद दायर करने की तिथि से 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के अंदर वर्तमान पैक्स अध्यक्ष को यह राशि ब्याज सहित वादिनी के पक्ष में भुगतान करना होगा।
इसके अतिरिक्त वादिनी को आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपए तथा वाद खर्च के रूप में 5 हजार रुपए देने का आदेश दिया गया है। इस प्रकार कुल 15 हजार रुपए अतिरिक्त राशि का भुगतान भी 30 दिनों के भीतर करना होगा।
भुगतान में देरी पर ब्याज बढ़कर 9 प्रतिशत होगा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि विपक्षी 30 दिनों की निर्धारित अवधि में आदेशित राशि का भुगतान नहीं करता है तो 6 प्रतिशत ब्याज के स्थान पर आदेश की तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज देय होगा। भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में वादिनी 60 दिनों के बाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत आयोग में आवेदन देकर दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर सकती हैं।






