सीवान :गुठनी में बाढ़ से पहले ही सजग हुआ विभाग, 98 लाख खर्च कर की तैयारी

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मैरीटार में 70 मीटर और केवटलिया में 300 मीटर का कटाव निरोधी कार्य

जल संसाधन विभाग ने दोनों गांवों में किया 98 लाख रुपए का खर्च

गुठनी (सीवान) : प्रखंड में बाढ़ से पहले तैयारियों को लेकर जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है। विभाग ने गोगरा तटबंध और उसके सटे इलाकों में हो रहे संभावित कटाव से निपटने के लिए पहले ही मोर्चा संभाल लिया है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, अब तक करीब 98 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जिनमें मैरीटार गांव के समीप 70 मीटर और केवटलिया गांव के पास 300 मीटर तक कटाव निरोधी कार्य किए गए हैं।जेई मदन मोहन ने जानकारी दी कि मैरीटार में जिओ बैग पिचिंग का कार्य कराया गया है, जबकि केवटलिया में भी व्यापक स्तर पर कटाव से सुरक्षा कार्य किया गया है। उनका कहना है कि यह कार्य बाढ़ के दौरान तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और कटाव की स्थिति में सहयोग प्रदान करेगा।

नरौली से रकौली तक 5 करोड़ खर्च, तटबंध और स्लूइस गेट को मिली मजबूती : कटाव निरोधी कार्यों के लिए बालू की बोरियों से लेकर एनसी बैग तक का उपयोगजल संसाधन विभाग से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में गुठनी प्रखंड के नरौली से लेकर रकौली घाट तक कटाव निरोधी कार्यों में 5 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की गई है। इन कार्यों में स्लूइस गेट निर्माण, तटबंध की मरम्मत और सुरक्षा, एनसी टो निर्माण, बालू की बोरियों और एनसी बैग जैसे संसाधनों का प्रयोग किया गया है।

तीरबलुआ गांव में समय से पहले पूरा हुआ 33 लाख का बाढ़ निरोधी कार्य : 335 मीटर तक किया गया कटाव रोधी काम, गांव को सुरक्षित किया गयागुठनी प्रखंड के तीरबलुआ गांव में वर्ष 2023 में जल संसाधन विभाग द्वारा 33 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 335 मीटर लंबा कटाव निरोधी कार्य किया गया। कार्य समय से पहले ही पूरा कर लिया गया। जानकारी के अनुसार, यह कार्य नदी द्वारा गांव के समीप हो रहे तेज कटाव को रोकने के उद्देश्य से किया गया था।विभाग द्वारा बांस की पाइलिंग, एमसी बैग, बालू की बोरियां, और जालीनुमा बैग का उपयोग कर गांव की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

“हर कार्य की गहराई से हो रही जांच” कार्यपालक पदाधिकारी : गोगरा तटबंध पर भी सतर्कता से चल रहा कार्यकार्यपालक पदाधिकारी मदन चंद्र चौधरी का कहना है कि जहां भी कटाव निरोधी कार्य किया गया है, वहां विभाग द्वारा गहराई से निरीक्षण और जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि गोगरा तटबंध जैसे संवेदनशील इलाकों में हमारी तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है, ताकि बाढ़ से पहले हर जोखिम को कम किया जा सके।

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