सिवान जिला मुख्यालय में हर दिन लगता है जेपी चौक से बबुनिया मोड़ तक महाजाम

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स्कूल के सामने बाइकें, सड़क पर साइन बोर्ड और टोटो की चार-चार लाइनें; ट्रैफिक व्यवस्था रोज बनती है मजाक

बिहार डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l पटना

सिवान। संवाददाता : शहर के मुख्य मार्ग जेपी चौक से बबुनिया मोड़ तक रोजाना लगने वाले जाम ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। सुबह हो या दोपहर या फिर स्कूल की छुट्टी का समय—यह पूरा इलाका मानो ठहर सा जाता है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने में ही लोगों को आधा घंटा से अधिक समय लग जाता है।

पब्लिक स्कूल के सामने हर दिन खड़ी रहती हैं बाइक की कतारें
जेपी चौक पर स्थित एक पब्लिक स्कूल के सामने बाइक सवार अभिभावकों की अवैध पार्किंग इस जाम की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। स्कूल के ठीक सामने सड़क पर दर्जनों बाइकें दोनों ओर खड़ी रहती हैं। वहीं पास में स्थित स्वीट्स दुकान के सामने भी इसी तरह अनियंत्रित पार्किंग की समस्या बनी रहती है। इन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस मौजूद तो रहती है, लेकिन अक्सर तमाशबीन बनी दिखाई देती है। लोग नियम तोड़ते रहते हैं और वाहनों की लाइनें लंबी होती जाती हैं।

दुकानदारों की मनमानी भी बढ़ा रही परेशानी
जाम का एक और बड़ा कारण है सड़क पर दुकानों द्वारा फैलाया गया अतिक्रमण। कई दुकानदार अपनी दुकान के सामने साइन बोर्ड, रैक और सामान रखकर सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। इससे सड़क और संकरी हो जाती है और दो वाहनों के एक साथ निकलना भी मुश्किल हो जाता है। शहरवासियों का कहना है कि जिला प्रशासन को ऐसे अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सड़क अपने मूल स्वरूप में लौट सके।

सबसे बड़ी चुनौती: टोटो चालकों की मनमानी
स्थानीय लोगों के अनुसार जाम का सबसे बड़ा सिरदर्द टोटो (ई-रिक्शा) वाले हैं। इनका कोई तय स्टॉपेज या नियम नहीं है। वे जहां-तहां खड़े हो जाते हैं और एक साथ तीन–चार लाइन लगाकर पूरी सड़क को जाम कर देते हैं। इनकी वजह से पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब ये वाहन बिना देखे अचानक मोड़ लेते हैं। लोग बताते हैं कि इनसे बातचीत करने पर भी वे किसी की बात मानते नहीं।

समाधान के लिए सामूहिक पहल जरूरी
शहरवासियों का मानना है कि जाम की समस्या का स्थायी समाधान तब ही संभव है, जब सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर बैठक की जाए। इसके लिए यात्रा प्रभारी अधिकारी से निवेदन किया गया है कि वे व्यापारी संगठनों, वाहन चालकों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर एक समग्र रणनीति तैयार करें।
लोगों का कहना है कि अगर अतिक्रमण हटे, अवैध पार्किंग पर रोक लगे, टोटो के लिए निर्धारित रूट और स्टॉपेज बनाए जाएं और ट्रैफिक पुलिस सक्रिय रूप से काम करे, तो शहर को रोजाना की इस महाजाम से राहत मिल सकती है।

फिलहाल शहरवासियों की उम्मीद प्रशासन की सख्ती और ठोस कदमों पर टिकी है।

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