Siwan Court Verdict: निबंधन कार्यालय में कातिब के बेटे की हत्या मामले में पिता समेत तीन पुत्रों को उम्रकैद

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जमीन रजिस्ट्री को लेकर हुआ था विवाद, एडीजे-5 की अदालत ने 302 में उम्रकैद और 307 में 10 साल की सजा सुनाई

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

विधि संवाददाता। सिवान :

सिवान जिले में बहुचर्चित कातिब के बेटे की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे-5 श्री उमाशंकर की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपी पिता और उसके तीन पुत्रों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अपर लोक अभियोजक अच्छेलाल यादव ने बताया कि अदालत ने आरोपित सत्य प्रकाश वर्मा, अमितेश कुमार, हितेश कुमार और मनीष कुमार वर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा दी है। इसके साथ ही धारा 307 के तहत प्रत्येक आरोपी को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

मामले की घटना 3 मार्च 2020 की है। उस दिन बसंतपुर निवासी मनोज कुमार बसंतपुर स्थित निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन की तरह कातिब का कार्य कर रहे थे। उनके साथ उनके दो पुत्र प्रभात कुमार और अजय राज भी सहयोग कर रहे थे। इसी दौरान उनके पटीदार सत्य प्रकाश वर्मा अपने पुत्रों के साथ वहां पहुंचे। बताया जाता है कि सत्य प्रकाश वर्मा का परिवार पहले बसंतपुर का निवासी था, लेकिन बाद में गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के बसहा गांव में रहने लगा था।

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निबंधन कार्यालय में पहुंचने के बाद सत्य प्रकाश वर्मा ने मनोज कुमार से कहा कि वे बसंतपुर स्थित अपनी जमीन की रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम करना चाहते हैं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपितों ने मनोज कुमार और उनके दोनों पुत्रों पर हमला कर दिया।

हमले में प्रभात कुमार और अजय राज गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान प्रभात कुमार की मौत हो गई। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई थी।

घटना के बाद मनोज कुमार के बयान पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें सत्य प्रकाश वर्मा और उनके तीनों पुत्रों को नामजद आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से विस्तृत बहस हुई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शंभू सिंह ने अपना पक्ष रखा।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी पाते हुए सख्त सजा सुनाई। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर संतोष जताया है।


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