Saran Teachers Constituency: शिक्षकों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ूंगा : नजमुल होदा

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03 सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के निर्दलीय प्रत्याशी ने वित्त रहित शिक्षकों के मानदेय, सातवें वेतनमान, पेंशन और एचआरए का मुद्दा उठाया

कहा- शिक्षकों के अधिकारों के लिए जारी रहेगा संघर्ष

चुनाव डेस्क l केएमपी भारत l पटना

संवाददाता । छपरा/ बेतिया/मोतिहारी

03 सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी नजमुल होदा ने शिक्षक समाज के अधिकारों और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने वित्त रहित शिक्षकों के मानदेय, सातवें वेतनमान, पेंशन, हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) और स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि शिक्षकों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की समस्याओं का स्थायी समाधान होना चाहिए, ताकि शिक्षकों को सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और भविष्य की सुरक्षा मिल सके।

नजमुल होदा ने कहा कि बिहार में शिक्षक लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कई बार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और मांगों को लेकर आवाज उठाई गई, लेकिन इसके बावजूद अनेक समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। शिक्षकों ने अपना पूरा जीवन विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाया है। ऐसे में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए। प्रत्याशी की ओर से जारी मतपत्र के नमूने में सैयद नजमुल होदा का नाम क्रमांक 17 पर दर्शाया गया है।

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वित्त रहित शिक्षकों को मिले सम्मानजनक मानदेय

निर्दलीय प्रत्याशी ने वित्त रहित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा बजट में बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद इन शिक्षकों को उनके श्रम के अनुरूप मानदेय और सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय है। वित्त रहित शिक्षकों के लिए भी सम्मानजनक मानदेय और बेहतर सेवा शर्तों की व्यवस्था होनी चाहिए।

सातवें वेतनमान और पेंशन का उठाया मुद्दा

नजमुल होदा ने कहा कि सातवें वेतनमान का लाभ शिक्षकों को किस आधार पर नहीं मिल रहा है, इस पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। जब अन्य राज्यकर्मियों को वेतनमान का लाभ मिल रहा है, तो शिक्षक समाज के साथ वेतन संबंधी समानता सुनिश्चित करने पर भी विचार होना चाहिए।

पेंशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने जीवन का लंबा समय बच्चों और समाज का भविष्य संवारने में लगा देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आर्थिक सुरक्षा जरूरी है। पेंशन किसी प्रकार का एहसान नहीं, बल्कि लंबे सेवाकाल के बाद सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।

एचआरए और स्थानांतरण में राहत की जरूरत

नजमुल होदा ने कहा कि हाउस रेंट अलाउंस में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन शिक्षकों को मिलने वाले लाभ और दूसरे राज्यकर्मियों की सुविधाओं के बीच अंतर को दूर करने की जरूरत है। सरकार को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए।

उन्होंने स्थानांतरण से जुड़ी परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरे जिले में पदस्थापन होने पर शिक्षकों को रहने और जरूरी सुविधाएं जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे स्थानांतरण के बाद शिक्षकों को शुरुआती अवधि में आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। इससे वे अनावश्यक परेशानियों से बचते हुए शिक्षण कार्य पर बेहतर ध्यान दे सकेंगे।

शिक्षकों से समर्थन की अपील, संघर्ष का संकल्प

नजमुल होदा ने कहा कि शिक्षक समाज अपने प्रतिनिधियों को भरोसे के साथ सदन तक भेजता है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि शिक्षकों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाएं और समाधान के लिए लगातार प्रयास करें।

उन्होंने शिक्षकों से समर्थन, स्नेह और आशीर्वाद की अपील करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि शिक्षक समाज के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करना है। उन्होंने संकल्प जताया कि शिक्षकों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार-विमर्श कराएंगे और उनकी आवाज सड़क से सदन तक पहुंचाते रहेंगे। जब तक समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं होगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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