तालाबों-नदियों में पीड़िया विसर्जन, महिलाओं के गीतों से गूंजा माहौल
डिजिटल डेस्क l केएमपी भारत न्यूज़ l पटना
संवाददाता, महाराजगंज (सीवान)। अनुमंडल मुख्यालय समेत आसपास के गांवों में शुक्रवार की रात पारंपरिक आस्था और उत्साह के बीच पीड़िया पर्व मनाया गया। एक माह तक चले इस पर्व का समापन शनिवार तड़के बहनों द्वारा पीड़िया विसर्जन के साथ हुआ। सुबह होते ही गांव-गांव से बहनों और युवतियों की टोली नाचते-गाते पोखरों और तालाबों की ओर निकल पड़ी। हाथों में सजे ठेले पर पीड़िया और होठों पर पारंपरिक गीत—इस दृश्य ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पीड़िया पर्व सदियों से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बहनों द्वारा भाई की दीर्घायु की कामना के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि भैया दूज के दिन बहनें गोबर से बने गणेश की आकृति—जिसे स्थानीय बोली में ‘पीड़िया’ कहा जाता है—को घर के कोने में स्थापित करती हैं। इसके बाद पूरे एक माह तक रोज पूजा-अर्चना के साथ लोकगीत गाए जाते हैं। अमावस्या के दिन पीड़िया को हटाया जाता है और अगले दिन इसका जल विसर्जन किया जाता है।
शनिवार को कलेक्टरी पोखरा, घरभरन साह पोखरा, कपीया गांव पोखरा व महुआरी पोखरा सहित कई घाटों पर मेले जैसा नजारा देखने को मिला। गांवों की गलियों में सुबह से ही सिहौता, इन्दौली, पसनौली, बंगरा, रिसौरा, जिगरवां, धोबवलिया, महुआरी और विशुनपुरा की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर पीड़िया लेकर पहुंचीं। युवतियों द्वारा नृत्य-गीत प्रस्तुत किए जाने से पूरा क्षेत्र उत्सवमय हो उठा।
बुजुर्ग महिलाओं के अनुसार पीड़िया पर्व की शुरुआत गोवर्धन पूजा के दिन से होती है। उसी दिन के गोबर से घर की दीवारों पर छोटी-छोटी पिंडियों के आकार में पीड़िया लगाई जाती है। इसके साथ सुबह-सुबह छोटी व बड़ी कथा सुनने की परंपरा भी है, जो कार्तिक चतुर्दशी से अगहन अमावस्या तक चलती है। व्रत के दिन व्रती महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को गुड़ व नए चावल से बना रसियाव ‘सोरहिया’ के साथ ग्रहण करती हैं।
जरती माई मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुरेंद्र तिवारी बताते हैं कि ‘पीड़िया’ शब्द दरअसल ‘पिंडी’ का अपभ्रंश है। गोबर की पिंडी बनाकर भगवान गणेश का स्वरूप स्थापित करने की परंपरा से इसका नाम ‘पीड़िया’ पड़ा। इसे शास्त्रों में ‘रूद्ध्रव्रत’ कहा गया है और आस्था है कि यह व्रत भाई को दीर्घायु व संकटों से रक्षा प्रदान करता है।
इस दौरान निधि कुमारी, रानी कुमारी, नीतू कुमारी, दीपाली कुमारी, ज्योति कुमारी, आस्था, अनुष्का, सिद्धि, खुशी, स्नेहा, संध्या, अंजली, सपना, रवीता, कमलावती, रंभा, निशा आदि युवतियां उपस्थित रहीं।






