शिव मंदिर से निकली शोभायात्रा, दाहा नदी से जल भरकर लौटी; नौ दिनों तक कथा, रामलीला और महाभंडारे का होगा आयोजन
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
कृष्ण मुरारी पांडेय। सीवान |
आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम के बीच शनिवार को बिन्दुसार हमीद गांव में 9 दिवसीय प्रतिष्ठात्मक श्री रूद्र महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। लगभग 5100 श्रद्धालु महिलाओं द्वारा सिर पर कलश धारण कर निकाली गई यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र बनी रही। https://youtube.com/shorts/W8F6mtj-G8I?si=WOyXm0AKAd61A5Z9
सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर से कलश यात्रा की शुरुआत हुई। महायज्ञ के मुख्य आचार्य दुर्गेश कुमार चौबे (राजा बाबू) के सानिध्य में यह धार्मिक आयोजन विधिवत प्रारंभ हुआ। यात्रा में शामिल श्रद्धालु महिलाएं गंगाजल से भरे कलश लेकर पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीतों और जयकारों के साथ आगे बढ़ती रहीं।

कलश यात्रा का मार्ग बिन्दुसार शिव मंदिर से प्रारंभ होकर रसूलपुर, आकोपुर पूरब टोला, पश्चिम टोला, हाकाम, ओरमा होते हुए बांसोपली पहुंचा। वहां स्थित दाहा नदी से वैदिक विधि से जल भरने के बाद यात्रा पुनः शिव मंदिर परिसर लौटी, जहां कलश स्थापना के साथ यात्रा का समापन हुआ।
इस आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में शैलेन्द्र पाण्डेय, रिधेश प्रसाद, राजीव पाण्डेय, धर्मेंद्र पाण्डेय, भोला पाण्डेय, प्रमोद, नरेश, रजनीश, गुड्डू एवं दुलु पाण्डेय सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। हजारों महिला श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस धार्मिक आयोजन को भव्यता प्रदान की।
महायज्ञ के दौरान नौ दिनों तक प्रतिदिन कथा, पूजन, हवन, भजन-कीर्तन, रामलीला एवं महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक वातावरण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहेगा।

आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के मनोरंजन और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशाल मेला भी लगाया गया है। मेले में झूले, खाने-पीने के स्टॉल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की दुकानों से ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
महायज्ञ की पूर्णाहुति आगामी 01 मार्च, रविवार को की जाएगी। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करेगा बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करेगा। लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजन गांव की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।






