North Bengal University: फिल्ममेकर व लेखक श्रेय राजदेव बोले- युवाओं को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और सामाजिक एकता से जोड़ना समय की जरूरत

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वीर सावरकर जयंती पर नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी में ‘मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का’ पुस्तक का विमोचन

सेंट्रल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l सिल्लीगुड़ी

संवाददाता l सिलीगुड़ी।

वीर सावरकर जयंती के अवसर पर नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी परिसर में एक विशेष साहित्यिक एवं वैचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां फिल्ममेकर एवं लेखक श्रेय राजदेव की पुस्तक “मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का” का विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के विचारों से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, समाजसेवी, शिक्षाविद, युवा एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग इसमें शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत वीर सावरकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं उनके राष्ट्रवादी विचारों को स्मरण करते हुए की गई। उपस्थित अतिथियों ने वीर सावरकर के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस अवसर पर लेखक श्रेय राजदेव ने अपनी पुस्तक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि “मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक स्वयंसेवक की वैचारिक यात्रा, सामाजिक अनुभवों और सांस्कृतिक चेतना का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और भारतीय मूल्यों को केंद्र में रखकर विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

श्रेय Rajdev ने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी जड़ों, परंपराओं और भारतीय सभ्यता से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने सकारात्मक संवाद, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने पर जोर देते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से रत्नेश त्यागी, नरेंद्र प्रसाद, अमरेंद्र पांडेय, बिनायक सुंदास, नंद किशोर गोयल, अधिराज और अमित सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पुस्तक के विषय और लेखक की सोच की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की वैचारिक पुस्तकें समाज में सकारात्मक ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का कार्य करती हैं।

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वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न वैचारिक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय मूल्यों पर आधारित साहित्य की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने युवाओं से पुस्तक पढ़ने और भारतीय इतिहास एवं संस्कृति को गहराई से समझने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान साहित्य, राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना और वीर सावरकर की विचारधारा पर खुलकर चर्चा हुई। कई वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

पूरे कार्यक्रम के दौरान नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी परिसर देशभक्ति और सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के बीच संवाद, परिचर्चा और स्मृति चित्रों का दौर चला। उपस्थित लोगों ने लेखक श्रेय राजदेव को पुस्तक के लिए शुभकामनाएं देते हुए इसे समाज और विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

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