₹7.19 लाख के भुगतान के बावजूद आंशिक आपूर्ति करने पर डीलर के खिलाफ आयोग सख्त
वारंट जारी होने के बाद जमा हुई रकम, जांच के बाद अतिरिक्त ₹3.80 लाख भी दिलाए गए
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना
विधि संवाददाता l सिवान।
जिले के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. खुर्शीद आलम को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से बड़ी राहत मिली है। डिजिटल प्लेट की खरीद में कथित सेवा में त्रुटि के मामले में आयोग ने न केवल चिकित्सक को उनकी बकाया राशि दिलाई, बल्कि विस्तृत जांच के बाद अतिरिक्त भुगतान का भी आदेश दिया। अंततः दो चरणों में भुगतान होने के बाद आयोग ने वादी के अनुरोध पर मामले का निष्पादन कर दिया।
मामले के अनुसार, डॉ. खुर्शीद आलम ने डिजिटल प्लेट खरीदने के लिए आईएस मेडिकल सिस्टम के डीलर अजीत कुमार को कुल ₹7,19,000 का भुगतान किया था। आरोप है कि भुगतान के बावजूद डीलर ने केवल ₹1,47,400 मूल्य की डिजिटल प्लेट की ही आपूर्ति की। शेष राशि के अनुरूप न तो सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही धनराशि वापस की गई। डॉ. आलम ने कई बार डीलर से संपर्क कर समस्या के समाधान का प्रयास किया, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
उपभोक्ता आयोग में वाद दायर होने के बाद विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी किया गया। इसके बावजूद डीलर आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। लगातार अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने उनके विरुद्ध वारंट जारी किया। इसके बाद पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया।
आयोग के समक्ष पेशी के दौरान विपक्षी ने आदेशित राशि आयोग के खाते में जमा करा दी। इसके आधार पर आयोग ने डॉ. खुर्शीद आलम को पहले चरण में ₹7,12,523 का चेक प्रदान किया। हालांकि, शेष देय राशि के संबंध में आयोग ने वादी को पुनः गणना कर आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
डॉ. खुर्शीद आलम द्वारा पुनर्गणना कर आवेदन देने के बाद आयोग के माननीय अध्यक्ष जयराम प्रसाद तथा सदस्य मनमोहन कुमार ने संचिका में उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत आवेदन की गहन जांच की। जांच के उपरांत आयोग ने पाया कि वादी को अतिरिक्त राशि भी देय है। इसके बाद आयोग ने दूसरे चरण में ₹3,80,586 का भुगतान भी चेक के माध्यम से कराया।
दोनों चरणों में भुगतान प्राप्त होने के बाद डॉ. खुर्शीद आलम ने आयोग के समक्ष राशि प्राप्त होने की स्वीकृति देते हुए वाद समाप्त करने का अनुरोध किया। वादी के आवेदन और भुगतान की पुष्टि के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले का निष्पादन करते हुए वाद को समाप्त कर दिया। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और सेवा में त्रुटि के मामलों में आयोग की सक्रिय भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।






