अंबेडकर स्थल पर एक दिवसीय प्रदर्शन, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये करने और मूल मनरेगा कानून बहाल करने की मांग
डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l मुजफ्फरपुर
अशफाक खान की रिपोर्ट। डुमरा (सीतामढ़ी)।
केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने आंदोलन की धार तेज कर दी है। जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस लगातार धरना-प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में मंगलवार को सीतामढ़ी जिला मुख्यालय डुमरा स्थित अंबेडकर स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह धरना महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम में किए गए बदलाव और इसके मूल स्वरूप से कथित छेड़छाड़ के विरोध में आयोजित किया गया।
धरने में शामिल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की साजिश कर रही है। उनका कहना था कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए आजीविका का सबसे बड़ा सहारा है, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण इसका प्रभाव लगातार कम होता जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि मूल मनरेगा कानून को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए और मजदूरों को वर्ष में 100 दिन काम की गारंटी वास्तविक रूप से सुनिश्चित की जाए।
धरना प्रदर्शन के दौरान मजदूरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन मजदूरों की मजदूरी उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई जा रही है। वर्तमान मजदूरी दर को नाकाफी बताते हुए उन्होंने न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करने की मांग की। नेताओं का कहना था कि कम मजदूरी के कारण ग्रामीण मजदूरों का जीवन यापन मुश्किल होता जा रहा है और सरकार इस ओर आंख मूंदे बैठी है।
धरने में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने की मांग भी जोर-शोर से उठी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पंचायतों को अधिकार और संसाधन दिए बिना ग्रामीण विकास की कल्पना अधूरी है। उनका आरोप था कि सरकार पंचायती राज संस्थाओं को कमजोर कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को नुकसान पहुंचा रही है।
यह एक दिवसीय धरना कांग्रेस जिला अध्यक्ष रकटू प्रसाद के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। धरना स्थल पर सरकार विरोधी नारे लगाए गए और मांगों से संबंधित तख्तियां प्रदर्शित की गईं। अंत में कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक व तेज किया जाएगा।






