Siwan News: गांधी की शहादत दिवस पर संगोष्ठी, बोले वक्ता—सत्य और अहिंसा से ही वर्तमान चुनौतियों का समाधान

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दारोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज में जलेस व शांति एकजुटता संगठन का संयुक्त आयोजन, गांधीवाद की प्रासंगिकता पर हुई गहन चर्चा

डिजिटल न्यूज़ डेस्क l केएमपी भारत l पटना

सीवान। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहादत दिवस के अवसर पर शनिवार को दारोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज के सभागार में जनवादी लेखक संघ (जलेस) एवं अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन के संयुक्त तत्वावधान में विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता युगल किशोर दूबे ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत कमलेश्वर ओझा ने गांधी जी को समर्पित देशभक्ति गीत “इस देश को हिन्दू न मुसलमान चाहिए, हर मज़हब जिसको प्यारा वो हिन्दुस्तान चाहिए” से की, जिसने सभागार को भावनात्मक माहौल से भर दिया।

“महात्मा गांधी की शहादत और वर्तमान संदर्भ” विषय पर आलेख प्रस्तुत करते हुए अरुण कुमार सिंह ने गांधी जी के जीवन, विचार और आंदोलनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, असहयोग, अवज्ञा आंदोलन, समग्र शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ग्राम विकास, स्वरोजगार और रोजगार सृजन ही समाज की वर्तमान चुनौतियों का शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और टिकाऊ समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. वीरेंद्र प्रसाद यादव ने सवाल उठाया कि देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना के खिलाफ है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिंह ने कहा कि जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब गांधी जी नोआखाली में साम्प्रदायिक हिंसा रोकने के लिए शांति स्थापना में लगे थे, लेकिन आज गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

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किसान नेता अर्जुन यादव ने मनरेगा को आम जनता के लिए काम मांगने का अधिकार बताते हुए कहा कि इस अधिकार को समाप्त करने की कोशिशें चिंताजनक हैं। सीपीआईएम के जिला सचिव फूल मोहम्मद ने गांधी जी के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसक तरीके से कानून तोड़कर भी जनआंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

मशहूर शायर अरशद सीवानी ने अपनी नज़्मों के माध्यम से गांधी जी को याद करते हुए उन्हें इंसानियत की मिसाल बताया। प्रोफेसर सौमित्र ने कहा कि गांधी का व्यक्तित्व इतना विराट है कि उसे आलोचनाओं की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

अन्य वक्ताओं में प्रो. उपेन्द्र नाथ यादव, डॉ. जगन्नाथ प्रसाद, श्रीराम सिंह, हैदर वारसी, परमा चौधरी, उपेन्द्र यादव शिक्षक, प्रो. प्रिय रंजन, प्रो. सुरेंद्र सिंह और प्रो. प्रदीप यादव शामिल रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में कन्हैया चौधरी, प्रो. शिवजी यादव, प्रो. इंद्रजीत चौधरी, प्रो. भरत प्रसाद सोनी, प्रो. ओबैद और भोगेंद्र झा की अहम भूमिका रही। जलेस के सचिव मार्कण्डेय ने संचालन किया, जबकि प्राचार्य डॉ. मुसाफिर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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